उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब, यात्री परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को अब नए नियामक ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली-2026 लागू कर दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब, यात्री परिवहन और डिलीवरी सेवाओं को अब नए नियामक ढांचे के तहत संचालित किया जाएगा। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली-2026 लागू कर दी है। नई व्यवस्था में यात्रियों की सुरक्षा, चालकों के कल्याण, किराये में पारदर्शिता, वाहन प्रदूषण की निगरानी और कंपनियों की जवाबदेही को लेकर कई अहम प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने इसके साथ यूपी माय फ्लीट एग्रीगेटर पोर्टल भी शुरू किया है। नई व्यवस्था के दायरे में केवल ऐप आधारित कैब सेवाएं ही नहीं, बल्कि ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी आएंगे, जो चालकों को ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं या अन्य प्रेषकों से जोड़कर सामान, कूरियर, पैकेज और पार्सल पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराते हैं। UP News
22 मई 2026 को जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू की गई नियमावली में एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं के लिए आवेदन, लाइसेंस, संचालन और सुरक्षा से जुड़े मानक तय किए गए हैं। एग्रीगेटर को आवेदन के लिए 25 हजार रुपये और लाइसेंस के लिए 5 लाख रुपये शुल्क देना होगा। इस व्यवस्था से कंपनियों के संचालन को औपचारिक नियामक ढांचे में लाने के साथ परिवहन विभाग के लिए उनकी निगरानी भी आसान होगी। कंपनियों को भी नियमों, सुरक्षा मानकों और सेवा की गुणवत्ता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिलेंगे। UP News
नई नियमावली में एग्रीगेटर की सुरक्षा जमा राशि को उसके वाहन बेड़े के आकार से जोड़ा गया है। 100 बस या 1,000 अन्य मोटर वाहनों तक के बेड़े के लिए 10 लाख रुपये की सुरक्षा राशि तय की गई है। वहीं 1,000 बस या 10,000 अन्य मोटर वाहनों तक के बेड़े के लिए यह राशि 25 लाख रुपये होगी। बड़े एग्रीगेटर, जिनके पास 1,000 से अधिक बस या 10,000 से ज्यादा अन्य मोटर वाहन हैं, उन्हें 50 लाख रुपये की सुरक्षा जमा करनी होगी। इसका उद्देश्य नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। नई नीति में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। एग्रीगेटर से जुड़े चालकों के चरित्र और पुलिस सत्यापन के साथ मनोवैज्ञानिक परीक्षण की व्यवस्था की गई है। चालकों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी देनी होगी। इसका उद्देश्य यात्रियों को सत्यापित और प्रशिक्षित चालक उपलब्ध कराने के साथ ऐप आधारित परिवहन सेवाओं में सुरक्षा का स्तर बेहतर करना है। नई व्यवस्था के तहत एग्रीगेटर को प्रत्येक यात्री के लिए बीमा उपलब्ध कराना होगा। इसके अलावा चालकों के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस देने का प्रावधान किया गया है। दुर्घटना, बीमारी या असमय मृत्यु जैसी परिस्थितियों में यह व्यवस्था चालक और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा देने में मदद कर सकती है। UP News
ऐप कैब में मांग बढ़ने पर किराये में अचानक होने वाली वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए नई नीति में डायनेमिक प्राइसिंग की सीमा निर्धारित की गई है। एग्रीगेटर बेस फेयर के मुकाबले अधिकतम 50 प्रतिशत तक किराया बढ़ा सकेंगे। इस प्रावधान से यात्रियों को पीक टाइम या अधिक मांग के दौरान अत्यधिक किराया वसूली से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही कंपनियों के लिए भी किराया तय करने की एक स्पष्ट सीमा निर्धारित हो गई है। UP News
बुकिंग स्वीकार करने के बाद यात्री को निर्धारित समय पर पिकअप नहीं करने की स्थिति में 100 रुपये के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। नियमों के अनुसार इस पेनाल्टी का लाभ यात्री को अगली यात्रा में दिया जाएगा। इससे बिना उचित कारण बुकिंग रद्द करने या यात्री को लेने नहीं पहुंचने जैसी समस्याओं पर नियंत्रण लगाने की कोशिश की गई है। प्रत्येक एग्रीगेटर को शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना अनिवार्य होगा। यात्री किराये, बुकिंग, चालक या सेवा से जुड़ी शिकायत इस निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों अथवा मोटर वाहन अधिनियम और संबंधित नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान भी किया गया है। UP News
नई नीति में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए वाहन प्रदूषण की निगरानी पर विशेष जोर दिया गया है। एग्रीगेटर के बेड़े में शामिल वाहनों की जानकारी पोर्टल के माध्यम से मॉनिटर की जाएगी। इससे वाहनों की स्थिति और नियमों के अनुपालन पर नजर रखने में मदद मिलेगी। सरकार ने एग्रीगेटर फ्लीट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव पर भी जोर दिया है। इससे आने वाले समय में कैब और डिलीवरी सेवाओं से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के तहत यूपी माय फ्लीट पोर्टल को डिजिटल निगरानी और प्रबंधन का प्रमुख माध्यम बनाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पोर्टल पर एनसीआर क्षेत्र के दो एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन ऑनबोर्ड हो चुके हैं। पोर्टल के जरिए सरकार एग्रीगेटर कंपनियों और उनके वाहनों से संबंधित जानकारी को एक जगह व्यवस्थित कर सकेगी। इससे नियमों के पालन, वाहन प्रदूषण और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर फ्लीट के बदलाव की निगरानी में मदद मिलेगी। UP News
नई एग्रीगेटर नीति से सरकार, कंपनियों, चालकों और यात्रियों के लिए अलग-अलग स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था तैयार हुई है। कंपनियों के लिए लाइसेंस और संचालन के नियम तय हुए हैं, जबकि परिवहन विभाग को निगरानी का डिजिटल माध्यम मिला है। चालकों के लिए सत्यापन, प्रशिक्षण, स्वास्थ्य बीमा और टर्म इंश्योरेंस जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। वहीं यात्रियों को सत्यापित चालक, बीमा सुरक्षा, किराये की सीमा, शिकायत निवारण और पिकअप नहीं होने की स्थिति में आर्थिक लाभ जैसी सुविधाएं मिलेंगी। UP News
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