
UP assembly elections 2022 : यूपी में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। राजनीकि दलों ने अपने अपने उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है। इसी क्रम में भाजपा ने भी 107 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है। पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा ने इस बार चुनाव में वही फॉर्मूला अपनाया है जो कभी कल्याण सिंह अपनाया करते थे। भाजपा दलित और पिछडा वर्ग का सामंजस्य बनाकर चुनाव में मिशन 300 प्लस को हासिल करना चाहती है।
भाजपा के तीन मंत्रियों स्वामी प्रसाद मौर्य, डाक्टर धर्म सिंह सैनी और दारा सिंह चौहान के पाला बदलने के बाद ऐसा लग रहा था कि यूपी में पिछड़ा समुदाय अखिलेश की तरफ शिफ्ट हो रहा है लेकिन अमित शाह ने कल्याण सिंह के फार्मूले पर चलते हुए सबसे ज्यादा टिकट पिछड़ा समुदाय को ही दिये हैं ताकि पार्टी के खिलाफ जो माहौल बन रहा है उसका डैमेज कंट्रोल किया जा सके।
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आपको बता दें कि भाजपा ने इस चुनाव में पूर्व सीएम कल्याण सिंह के फार्मूले को तरजीह देते हुए आगे बढ़ने का फैसला किया है। इसी फार्मूले पर चलते हुए भाजपा को 1991 में पूर्ण बहुमत मिला था। ठीक वैसा ही इतिहास 2014 में भी दोहराया गया था जब ओबीसी और दलित समाज की एकजुटता की वजह से सफलता मिली थी। कल्याण सिंह के फार्मूले का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है की भाजपा की पहली लिस्ट में 44 ओबीसी और 19 दलित को टिकट दिया गया है जो लगभग 60 फीसदी के करीब है। सहारनपुर देहात सीट जो सामान्य है, पर भी पूर्व विधायक जगपाल सिंह को तरजीह दी गई है। हालांकि पिछले चुनाव में भी भाजपा ने पहली लिस्ट में 44 ओबीसी उम्मीदवारों को टिकट दिया था।
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दरअसल भाजपा अब उन दलित वोटरों को साधना चाहती है जिनका बसपा से मोहभंग हो रहा है। भाजपा दलित जाटव में सेंध लगाना चाहती है इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल बेबीरानी मौर्य समेत 19 लोगों को टिकट दिया गया है। दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 की तुलना में दलित और मुस्लिम के गठजोड़ की वजह से 9 सीटों से हाथ धोना पड़ा था और मायावती 10 सीटों पर जितभासिल करने में कामयाब हुई थी। उधर, मायावती भी दलित वोटरों को लेकर काफी सर्तक हैं क्योंकि भाजपा की कोशिश है कि खास इलाके में जाटव वोटरों को भाजपा में ट्रांसफर किया जाए। इसी संभावनाओं को देखते हुए भाजपा ने 13 जाटव दलित को टिकट दिया है। आपको बता दें कि जाटव एक उप जाति है और दलित हैं।जिसका वेस्ट यूपी की कई विधानसभाओं में अच्छा खासा प्रभाव है। वहीं ओबीसी और दलित के अलावा यदि बात सवर्णों की करें तो तो सबसे ज्यादा टिकट ठाकुर समुदाय को मिला है और उसके बाद ब्राह्मणों को पार्टी ने टिकट दिया है।