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UP BJP Team : बीजेपी प्रदेश में संगठन को नया रूप देना चाहती है साथ ही नए सियासी तेवर और कलेवर अपनाना चाहती है। लेकिन नई टीम के गठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन सबसे बड़ा फैक्टर बनेगा।

UP News: यूपी में अगले साल होने वाले चुनाव के लिए बीजेपी अब एक्टिव मोड में आ गई है। पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को लेकर फाइनल राउंड का मंथन शुरू हो गया है। बीजेपी प्रदेश में संगठन को नया रूप देना चाहती है साथ ही नए सियासी तेवर और कलेवर अपनाना चाहती है। लेकिन नई टीम के गठन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन सबसे बड़ा फैक्टर बनेगा।
प्रदेश अध्यक्ष बनने के छह महीने बाद पंकज चौधरी की टीम का गठन अंतिम दौर में है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ यूपी बीजेपी नेताओं की दूसरी बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रदेश की नई टीम को फाइनल किया जाएगा। पिछले हफ्ते नितिन नवीन और बीएल संतोष के साथ हुई बैठक में पंकज चौधरी ने प्रदेश कार्यकारिणी के संभावित नामों की सूची हाईकमान को सौंपी थी।
जीत की हैट्रिक लगाना लक्ष्य
बीजेपी का लक्ष्य यूपी में जीत की हैट्रिक लगाना है और पार्टी कोई चांस नहीं लेना चाहती। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूपी में संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव हो सकता है। बीजेपी की नई प्रदेश टीम में करीब 55 से 60 प्रतिशत नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। एक ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है जिसमें नए कार्यकर्ताओं को मौका भी मिले और चुनावी अनुभव रखने वाले नेताओं की उपयोगिता भी बनी रहे।
किन नेताओं को मिल सकता है मौका
प्रदेश संगठन में उन नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जिनकी पकड़ बूथ स्तर तक मजबूत हो। इसके साथ ही जो सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीन पर भी सक्रिय हों। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नए चेहरों को लेकर भी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखा जाएगा। पार्टी पिछड़ा वर्ग, गैर-यादव ओबीसी, दलित उपजातियों और युवा मतदाताओं पर फोकस बनाए रखना चाहती है। क्षेत्रीय संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा। पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड और अवध — हर क्षेत्र से ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश होगी जो अपने इलाके में संगठन को नई ऊर्जा दे सकें।
पुराने लोगों की विदाई
नए संगठन में कई बड़े नाम बाहर हो सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी सभी 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदल सकती है। नए क्षेत्रीय अध्यक्षों को चुनते समय सामाजिक समीकरण को सबसे अधिक अहमियत दी जाएगी। पश्चिम यूपी में जाट-ओबीसी समीकरण, पूर्वांचल में गैर-यादव पिछड़े और दलित वर्ग, जबकि मध्य यूपी में ब्राह्मण-ओबीसी संतुलन का ध्यान रखा जाएगा।UP News
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