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उत्तर प्रदेश भाजपा की नई संगठनात्मक टीम के गठन को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अधिकांश नामों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन कुछ हाई-प्रोफाइल और वीआईपी मामलों पर अंतिम फैसला अभी भी लंबित है।

UP News : उत्तर प्रदेश भाजपा की नई संगठनात्मक टीम के गठन को लेकर सस्पेंस लगातार बना हुआ है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक अधिकांश नामों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन कुछ हाई-प्रोफाइल और वीआईपी मामलों पर अंतिम फैसला अभी भी लंबित है। यही कारण है कि पूरी सूची पर अंतिम मुहर फिलहाल शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर अटकी हुई है। बताया जा रहा है कि कुछ महत्वपूर्ण नामों को लेकर दिल्ली में गंभीर मंथन जारी है। इन्हीं अटके हुए निर्णयों के चलते प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली में डटे हुए हैं। संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने के लिए लगातार बैठकों का दौर जारी है, लेकिन अंतिम सहमति अभी नहीं बन सकी है। UP News
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, फाइनल सूची लगभग तैयार है, लेकिन कुछ चुनिंदा मामलों में “फूंक-फूंककर कदम” रखने की रणनीति अपनाई जा रही है। यह मामले विशेष रूप से ऐसे चेहरों से जुड़े हैं, जिनका राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है। इसी वजह से निर्णय सीधे शीर्ष स्तर से ही लिए जा रहे हैं। सूत्र यह भी बताते हैं कि काशी क्षेत्र जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के मामलों में भी अंतिम सहमति दिल्ली स्तर से ली जा रही है। यही नहीं, प्रदेश टीम और कुछ क्षेत्रीय अध्यक्षों के चयन को लेकर भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है। जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी अंतिम चरण की बातचीत और मुलाकात अभी शेष है। माना जा रहा है कि इसी बैठक के बाद नई टीम के गठन की आधिकारिक घोषणा संभव होगी। UP News
पार्टी हलकों में चर्चा है कि एक केंद्रीय मंत्री के पुत्र और एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के पौत्र के नाम पर भी शीर्ष नेतृत्व की सहमति जरूरी है। बताया जा रहा है कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अपने पौत्र को आगामी विधानसभा चुनाव में भी उतारने की तैयारी में हैं, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।इसी बीच संगठन में बड़े बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि मौजूदा टीम के दर्जन भर से अधिक चेहरे नई कार्यकारिणी से बाहर हो सकते हैं। वहीं कुछ नए चेहरों को प्रमोशन देकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। प्रदेश स्तर पर भी पदों को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है। दो प्रदेश मंत्रियों अभिजात मिश्रा और अर्चना मिश्रा के बीच प्रदेश महामंत्री पद को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा बताई जा रही है। दोनों ही नेताओं के पास मजबूत राजनीतिक समर्थन मौजूद है, ऐसे में चयन को लेकर मुकाबला दिलचस्प हो गया है। इसी तरह कुछ क्षेत्रीय अध्यक्ष भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। वाराणसी में रामसकल पटेल को जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद काशी क्षेत्र के नेतृत्व को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। UP News
हालांकि संगठनात्मक बदलाव की बड़ी सूची अभी प्रतीक्षित है, लेकिन भाजपा ने दो दिन पहले पांच जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर शुरुआती संकेत जरूर दे दिए हैं। जिन जिलों में नए अध्यक्ष घोषित किए गए हैं, उनमें अंबेडकरनगर से दिलीप देव पटेल, वाराणसी से रामसकल पटेल, चंदौली से काशीनाथ सिंह, गोरखपुर महानगर से रमेश प्रसाद गुप्ता और देवरिया से काली प्रसाद शामिल हैं। इन नियुक्तियों में जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। दिलीप देव पटेल और रामसकल पटेल ओबीसी वर्ग से आते हैं, जबकि काली प्रसाद दलित समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। UP News
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