चर्चित स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश से छेड़ा बड़ा अभियान

शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लखनऊ के लिए रवाना होते हुए उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक और विडंबनापूर्ण स्थिति है कि अपने ही देश में गौ रक्षा जैसे आस्था और परंपरा से जुड़े विषय पर जनजागरण और संघर्ष की राह पकड़नी पड़ रही है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 03:04 PM
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UP News :  ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश से अपने बहुचर्चित अभियान का औपचारिक शंखनाद कर दिया है। शनिवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लखनऊ के लिए रवाना होते हुए उन्होंने कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक और विडंबनापूर्ण स्थिति है कि अपने ही देश में गौ रक्षा जैसे आस्था और परंपरा से जुड़े विषय पर जनजागरण और संघर्ष की राह पकड़नी पड़ रही है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह अब केवल धार्मिक भावना का मामला नहीं रह गया, बल्कि उत्तर प्रदेश की धरती से उठी व्यापक सामाजिक चेतना का अभियान बन चुका है।

लखनऊ में होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की यह यात्रा उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों से होकर राजधानी लखनऊ पहुंचेगी। इस अभियान का समापन 11 मार्च को लखनऊ में प्रस्तावित विशाल जनसभा के रूप में होगा, जहां बड़ी संख्या में संत-समाज की मौजूदगी रहने की बात कही जा रही है। इस सभा में गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को औपचारिक रूप से और तेज आवाज में उठाया जाएगा।

शंकराचार्य का कहना है कि उत्तर प्रदेश से उठने वाली यह आवाज पूरे देश में संदेश देगी। उन्होंने दावा किया कि समाज का हर वर्ग—चाहे वह किसी भी वर्ण, वर्ग या पृष्ठभूमि से जुड़ा हो—गौ संरक्षण के मुद्दे पर एकजुट दिख रहा है।

‘धर्मयुद्ध’ शब्द के साथ दिया बड़ा संदेश

वाराणसी से प्रस्थान से पहले शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि गौमाता की रक्षा के लिए अब निर्णायक संघर्ष की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के जिन-जिन जिलों से यह यात्रा गुजरेगी, वहां जनप्रतिनिधियों से भी स्पष्ट रुख की अपेक्षा की जाएगी। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि सांसद और विधायक खुलकर बताएं कि वे गौ संरक्षण के पक्ष में खड़े हैं या नहीं। उन्होंने इस अभियान को “गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा” से जोड़ा और कहा कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जनमत तैयार करने का प्रयास है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने पहले ही सरकार को समयसीमा दी थी। उनका कहना है कि तय अवधि बीतने के बाद अब आंदोलनात्मक चरण शुरू किया गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में यह यात्रा निकाली जा रही है, ताकि गांव-गांव और शहर-शहर लोगों तक संदेश पहुंचाया जा सके।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि लखनऊ की सभा के बाद आंदोलन की अगली दिशा तय की जाएगी। यानी उत्तर प्रदेश की राजधानी में होने वाली बैठक इस पूरे अभियान के लिए अहम मोड़ साबित हो सकती है।

धार्मिक अनुष्ठानों के बाद यात्रा को किया रवाना

यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने गौशाला पहुंचकर गौपूजन किया। इसके बाद काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना और पाठ के उपरांत वे लखनऊ के लिए रवाना हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला। जयघोष, शंखनाद और धार्मिक नारों के बीच यात्रा का प्रस्थान हुआ। बताया जा रहा है कि यह यात्रा उत्तर प्रदेश के वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई और सीतापुर जैसे जिलों से गुजरते हुए लखनऊ पहुंचेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक भी साथ चल रहे हैं। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगी, बल्कि रास्तेभर जनसंपर्क, संवाद और संदेश-वितरण पर विशेष फोकस रहेगा। इसके लिए पोस्टर, पर्चे और स्थानीय संपर्क कार्यक्रमों की भी व्यवस्था की गई है। इस तरह उत्तर प्रदेश में यह यात्रा धार्मिक, सामाजिक और जनआंदोलन—तीनों रूपों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।

डिप्टी सीएम के बयान पर भी की टिप्पणी

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की ओर से स्वागत संबंधी प्रतिक्रिया पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह वही समय है जब लोगों को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उनके मुताबिक, जो लोग गौमाता के समर्थन में हैं, वे खुलकर सामने आएंगे, जबकि विरोध करने वाले चुप्पी साधे रहेंगे। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ में होने वाली संत सभा में यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि इस अभियान के साथ कौन-कौन खड़ा है और आगे आंदोलन किस दिशा में बढ़ेगा। इस लिहाज से देखा जाए तो उत्तर प्रदेश अब इस मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बनता नजर आ रहा है। UP News


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उत्तर प्रदेश के इस जिले में 11 मार्च से सेना अग्निवीर भर्ती रैली, 12 जिलों के युवा होंगे शामिल

अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बरेली में आने वाला है। सेना की अग्निवीर भर्ती रैली 11 मार्च से जाट रेजीमेंट सेंटर में आयोजित की जा रही है। इस रैली में बरेली समेत कुल 12 जिलों के अभ्यर्थी भाग लेंगे। इस भर्ती रैली कि पिछले काफी समय से अभ्यर्थी प्रतिक्षा कर रहे थे।

barely bharti
सेना में अग्निवीर बनने की तैयारी
locationभारत
userयोगेन्द्र नाथ झा
calendar07 Mar 2026 02:52 PM
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UP News : भारतीय सेना में अग्निवीर बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर बरेली में आने वाला है। सेना की अग्निवीर भर्ती रैली 11 मार्च से जाट रेजीमेंट सेंटर में आयोजित की जा रही है। इस रैली में बरेली समेत कुल 12 जिलों के अभ्यर्थी भाग लेंगे। इस भर्ती रैली कि पिछले काफी समय से अभ्यर्थी प्रतिक्षा कर रहे थे।

शामिल होने वाले जिलों की सूची

इस भर्ती रैली में बरेली, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, सीतापुर, संभल, पीलीभीत, हरदोई, फर्रुखाबाद और बदायूं के उम्मीदवार शामिल होंगे। रैली 11 मार्च की सुबह छह बजे से शुरू होगी, इसलिए अभ्यर्थियों से कहा गया है कि वे समय पर सभी जरूरी दस्तावेज और एडमिट कार्ड लेकर पहुंचे।

अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

अभ्यर्थियों को अपने एडमिट कार्ड पर लिखी तिथि के अनुसार रैली में उपस्थित होना अनिवार्य है। यदि किसी को एडमिट कार्ड को डाउनलोड करने में समस्या आ रही है, तो वे सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच सेना भर्ती कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

प्रवेश परिसर में एक दिन पूर्व शाम से ही अभ्यर्थियों के प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होगी।

प्रशासन ने की व्यापक तैयारियां

जिलाधिकारी ने रैली को सुचारू रूप से आयोजित करने के लिए सभी विभागों को निर्देश दिए हैं। तैयारियों में शामिल हैं। बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था एवं वाटर टैंक, बायो टॉयलेट और सफाई कर्मियों की ड्यूटी तथा 108 एंबुलेंस और हेल्थ कैंप और रैलियों के लिए फ्लेक्स लगी बसों और रैन बसेरों की व्यवस्था की जाएगी।

जिलेवार और ट्रेडवार भर्ती कार्यक्रम

* 11 मार्च- अग्निवीर (टेक्निकल)- सभी 12 जिलों के अभ्यर्थी

* 12 मार्च- अग्निवीर (ट्रेड्समेन 8वीं/10वीं) और क्लर्क/एसकेटी

* 13 मार्च- जनरल ड्यूटी: बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी

* 14 मार्च- जनरल ड्यूटी: शाहजहांपुर, सीतापुर

* 15 मार्च- जनरल ड्यूटी: संभल, पीलीभीत

* 16 मार्च- जनरल ड्यूटी: हरदोई

* 17 मार्च- जनरल ड्यूटी: फरुर्खाबाद

* 18 मार्च- जनरल ड्यूटी: बदायूं

* 19 मार्च- जनरल ड्यूटी: बरेली UP News



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उत्तर प्रदेश में वोटर लिस्ट को लेकर बढ़ी हलचल, इस दिन आएगी अंतिम लिस्ट

चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं।

नवदीप रिणवा
नवदीप रिणवा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar07 Mar 2026 01:20 PM
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UP News : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश में में बड़ी संख्या में लोग वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने और हटवाने के लिए आवेदन कर रहे हैं, जिससे साफ है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियां जमीनी स्तर पर तेज हो चुकी हैं। चुनाव विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक 84 लाख से अधिक लोगों ने मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन किया है, जबकि 3 लाख से ज्यादा लोगों ने अपने नाम हटवाने के लिए फॉर्म जमा किए हैं। अब उत्तर प्रदेश में इस पूरी कवायद का अगला अहम चरण सुनवाई का होगा, जिसके बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में पहुंचे आवेदन

मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा समाप्त होने से पहले उत्तर प्रदेश में अंतिम 24 घंटे के दौरान भी आवेदन का सिलसिला तेज बना रहा। इस अवधि में 1.66 लाख लोगों ने फॉर्म-6 भरकर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की मांग की। वहीं 7,329 लोगों ने फॉर्म-7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए आवेदन दिया। शुक्रवार को दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि पूरी होने के साथ ही अब उत्तर प्रदेश में इस प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें प्राप्त आवेदनों और नोटिस वाले मामलों की सुनवाई की जाएगी।

ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश में बढ़े नाम जुड़वाने के आवेदन

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के मुताबिक, 6 जनवरी को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद से 6 मार्च तक उत्तर प्रदेश में 70,69,810 लोगों ने फॉर्म-6 भरकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया। इसी अवधि में 2,642 आवेदन फॉर्म-6(ए) के तहत प्राप्त हुए। वहीं, इसी दौरान उत्तर प्रदेश में 2,68,682 लोगों ने फॉर्म-7 भरकर मतदाता सूची से नाम हटाने की मांग की। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर लोगों की भागीदारी व्यापक स्तर पर देखने को मिल रही है।

ड्राफ्ट लिस्ट से पहले भी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में आए थे आवेदन

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने से पहले भी उत्तर प्रदेश में मतदाता पंजीकरण को लेकर पर्याप्त सक्रियता रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उस चरण में 16,18,574 लोगों ने अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आवेदन किया था। इसके अलावा 49,399 लोगों ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म जमा किए। इन दोनों चरणों के आंकड़ों को मिलाकर देखें तो उत्तर प्रदेश में नाम जोड़ने के लिए आए आवेदनों की संख्या बहुत बड़ी है, जो बताती है कि प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को गंभीरता से लिया गया है। दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का फोकस सुनवाई पर रहेगा। निर्वाचन विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में नोटिस पाने वाले करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई 27 मार्च तक पूरी की जाएगी। इसके बाद सभी दावों, आपत्तियों और जांच प्रक्रियाओं का निस्तारण कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके बाद उत्तर प्रदेश की संशोधित और अंतिम वोटर लिस्ट 10 अप्रैल को प्रकाशित कर दी जाएगी। माना जा रहा है कि यह सूची आगामी चुनावी रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम साबित होगी।

उत्तर प्रदेश में 1.04 करोड़ नामों का 2003 की सूची से नहीं हुआ मिलान

निर्वाचन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उत्तर प्रदेश के उन मतदाताओं का सत्यापन भी है, जिनके रिकॉर्ड पुराने डाटाबेस से मेल नहीं खा रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, प्रदेश में करीब 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता हैं, जिनके नाम का मिलान वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो सका है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश में लगभग 2.22 करोड़ मतदाताओं के नामों और विवरणों में तार्किक विसंगतियां पाई गई हैं। इन मामलों की पड़ताल जारी है, ताकि अंतिम सूची अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाई जा सके।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों की भागीदारी रही बेहद सीमित

मतदाता सूची पुनरीक्षण जैसे अहम अभियान में उत्तर प्रदेश के राजनीतिक दलों की सक्रियता अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दी। अब तक भरे गए 84 लाख से अधिक फॉर्म-6 में से केवल 40,643 आवेदन ही राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (BLA) के माध्यम से भरवाए गए। इनमें सबसे ज्यादा 26,253 फॉर्म भाजपा के बीएलए के जरिए भरे गए। यह आंकड़ा बताता है कि उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी इस व्यापक प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की प्रत्यक्ष भागीदारी सीमित रही, जबकि आम मतदाताओं ने खुद आगे बढ़कर आवेदन किए।

6 जनवरी को जारी हुई थी उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने 6 जनवरी को उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की थी। इस ड्राफ्ट में 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। आयोग के अनुसार, यह कवायद उन 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 27 अक्टूबर से की गई थी। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और राजनीतिक रूप से निर्णायक राज्य में यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ प्रशासनिक अभ्यास नहीं, बल्कि चुनावी पारदर्शिता और मतदाता डेटा की शुद्धता से जुड़ा बड़ा अभियान मानी जा रही है। UP News

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