उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए बिजनेस पार्क विकसित करने का रास्ता खोल दिया है। नई नीति के तहत पात्र निजी डेवलपर्स को 45 साल की लीज पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

UP News : उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने निजी क्षेत्र के लिए बिजनेस पार्क विकसित करने का रास्ता खोल दिया है। नई नीति के तहत पात्र निजी डेवलपर्स को 45 साल की लीज पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर इस लीज अवधि को अगले 45 साल के लिए बढ़ाने का प्रावधान भी रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था दूसरे कई राज्यों की तुलना में अधिक लंबी अवधि की है, जहां आमतौर पर 30 से 35 साल तक की लीज दी जाती है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में बिजनेस पार्क की अवधारणा पहले से लागू है। अब उत्तर प्रदेश ने भी निजी बिजनेस पार्क विकास योजना को मंजूरी देकर इस क्षेत्र में निजी निवेश को आकर्षित करने की पहल की है। UP News
नई बिजनेस पार्क नीति के तहत बिजनेस कंसोर्टियम, रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) और सूचीबद्ध कंपनियां परियोजनाएं विकसित कर सकेंगी। इसके लिए कंपनियों की वित्तीय क्षमता और अनुभव को भी पात्रता का आधार बनाया गया है। पात्र डेवलपर या कंसोर्टियम की न्यूनतम नेटवर्थ 1,000 करोड़ रुपये होनी चाहिए। इसके अलावा पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम 500 करोड़ रुपये होना जरूरी है। रियल एस्टेट डेवलपमेंट और कमर्शियल बिजनेस के क्षेत्र में कम से कम सात साल का अनुभव रखने वाले कंसोर्टियम को भी योजना में शामिल होने का अवसर मिलेगा। UP News
नीति के मुताबिक बिजनेस पार्क का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 एकड़ रखा गया है। डेवलपर इसे बढ़ाकर 20 से 30 एकड़ तक कर सकता है। 10 एकड़ तक के बिजनेस पार्क का विकास अधिकतम तीन साल के भीतर पूरा करना होगा। सरकार ने पार्क के भीतर अलग-अलग गतिविधियों के लिए भूमि के इस्तेमाल का अनुपात भी तय किया है। कुल क्षेत्रफल का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा आईटी कंपनियों, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) और नॉलेज-बेस्ड सर्विस यूनिट्स के लिए रखना होगा। वहीं, अधिकतम 10 प्रतिशत क्षेत्र में फूड कोर्ट, रिटेल आउटलेट और कर्मचारियों व आगंतुकों के लिए जरूरी अन्य सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी। बाकी हिस्से में ट्रेनिंग सेंटर और स्किल डेवलपमेंट सेंटर जैसी सुविधाएं विकसित करने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन तैयार करना है। UP News
नीति के तहत परियोजना के लिए जरूरी अनुमोदन और मंजूरियां सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। डेवलपर को संबंधित सभी एनओसी, परमिट और अन्य स्वीकृतियां हासिल करनी होंगी। साथ ही भवन उपविधियों के अनुरूप परियोजना का लेआउट, आर्किटेक्चरल प्लान और डिजाइन तैयार करना होगा। भूमि आवंटन के लिए औद्योगिक विकास प्राधिकरण की भूमिका अहम होगी। राज्य सरकार बिजनेस पार्क के लिए उपयुक्त भूखंडों की पहचान करेगी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत निजी डेवलपर्स को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। UP News
निजी बिजनेस पार्क विकसित करने वाली कंपनियों को सरकार ने आर्थिक राहत भी दी है। परियोजना के लिए जमीन के रजिस्ट्रेशन पर स्टांप ड्यूटी में 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान किया गया है। नीति के तहत न्यूनतम अग्रिम भूमि प्रीमियम 5 प्रतिशत और राजस्व हिस्सेदारी 7 प्रतिशत निर्धारित की गई है। सरकार की कोशिश है कि इन रियायतों और आसान अनुमोदन प्रक्रिया के जरिए बड़े निवेशकों को उत्तर प्रदेश में बिजनेस पार्क स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। बिजनेस पार्कों में आईटी, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ज्ञान आधारित सेवाओं से जुड़ी कंपनियों को जगह मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। प्रशिक्षण और कौशल विकास केंद्रों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण देने में भी मदद मिल सकती है। UP News
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