विज्ञापन
UP News: जब पिता की जिंदगी मुश्किल दौर से गुजर रही थी तब उनकी बेटियों ने ऐसा कदम उठाया जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है और दोनों बेटियों की खूब तारीफ हो रही है।

Ghaziabad News: कहा जाता है कि बेटियां परिवार की सबसे बड़ी ताकत होती हैं। परिवार पर जब किसी भी तरह की मुश्किल आती है तो बेटियां ही सबसे मजबूत सहारा बनकर खड़ी होती हैं। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मोरटा गांव से सामने आई एक कहानी ने इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है। फादर्स डे से ठीक पहले गाजियाबाद की दो बेटियों ने अपने पिता के लिए ऐसा त्याग किया जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके जोरों-शोरों से हो रही है। जब पिता की जिंदगी खतरे में थी और डॉक्टरों ने लीवर तथा किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई तब दोनों बेटियां बिना किसी झिझक के आगे आईं। एक बेटी ने अपनी किडनी दान की जबकि दूसरी ने अपने लीवर का हिस्सा देकर पिता को नया जीवन देने का फैसला किया।
जानकारी के मुताबिक, मोरटा गांव निवासी 45 वर्षीय जयंत त्यागी पिछले करीब एक साल से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कर रहे थे। शुरुआत में उन्हें सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराया गया लेकिन समय के साथ उनकी हालत बिगड़ती चली गई। करीब तीन महीने पहले तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्होंने पूरी जांच कराई। जांच रिपोर्ट आने के बाद परिवार को बड़ा झटका लगा। डॉक्टरों ने बताया कि, उनकी किडनी और लीवर दोनों गंभीर रूप से प्रभावित हो चुके हैं। उन्हें बचाने के लिए जल्द से जल्द ट्रांसप्लांट (Transplant) की जरूरत है। यह सुनकर पूरा परिवार चिंता में पड़ गया।
जब परिवार उपयुक्त डोनर की तलाश में था तब जयंत त्यागी की दोनों बेटियां आगे आईं। 22 साल की रिषिका त्यागी और 19 साल की खुशी त्यागी ने बिना ज्यादा देर लगाए फैसला कर लिया कि वे अपने पिता के लिए अंगदान करेंगी। बड़ी बेटी रिषिका ने किडनी देने की हामी भरी जबकि छोटी बेटी खुशी ने अपने लीवर का हिस्सा देने का फैसला किया। परिवार ने दोनों को समझाने की कोशिश भी की लेकिन दोनों का जवाब एक ही था, "अगर पापा ही नहीं रहेंगे तो बाकी सब चीजों का क्या मतलब है?"
इसका एक पहलू बड़ी बेटी रिषिका से भी जुड़ा है। रिषिका की शादी कुछ महीनों बाद होने वाली है इसलिए परिवार के कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी था कि कहीं उनके इस फैसले का असर आगे की जिंदगी पर न पड़े लेकिन रिषिका ने इन बातों को ज्यादा महत्व नहीं दिया। जब उन्होंने अपने होने वाले ससुराल वालों को अंगदान के फैसले के बारे में बताया तो वहां से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। ससुराल पक्ष ने न सिर्फ उनके फैसले का सम्मान किया बल्कि हर कदम पर उनका हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जो बेटी अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए इतना बड़ा फैसला ले सकती है उस पर गर्व होना चाहिए। परिवार के इस समर्थन ने रिषिका को और हिम्मत दी।
इलाज के दौरान डॉक्टरों ने परिवार के कई लोगों की जांच की ताकि यह पता लगाया जा सके कि जयंत त्यागी के लिए कौन सबसे सही डोनर हो सकता है। सभी जांच रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि रिषिका और खुशी दोनों अपने पिता को अंगदान कर सकती हैं। इसके बाद अस्पताल की तरफ से जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की गई और डॉक्टरों ने परिवार से कई दौर की बातचीत भी की। इस दौरान परिवार काफी तनाव में था लेकिन दोनों बेटियां अपने फैसले से पीछे नहीं हटीं। उनके लिए सबसे जरूरी अपने पिता की जान बचाना था।
सभी जरूरी तैयारियां पूरी होने के बाद नोएडा के एक निजी अस्पताल में जयंत त्यागी का ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों की टीम ने कई घंटों तक चली सर्जरी में किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी की। राहत की बात यह रही कि ऑपरेशन सफल रहा। जानकारी के अनुसार, फिलहाल जयंत त्यागी और उनकी छोटी बेटी खुशी आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में हैं। वहीं बड़ी बेटी रिषिका की तबीयत सामान्य है। डॉक्टरों का कहना है कि तीनों की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और रिकवरी भी अच्छी चल रही है।
पिता की जान बचाने के लिए दोनों बेटियों ने जो फैसला लिया उसकी चर्चा अब पूरे गांव में हो रही है। परिवार के लोगों का कहना है कि शुरुआत में सभी को बेटियों की सेहत और उनके भविष्य की चिंता थी लेकिन दोनों ने साफ कर दिया था कि इस समय उनके लिए सबसे जरूरी अपने पिता को स्वस्थ देखना है। दोनों बेटियों के इस कदम की हर कोई सराहना कर रहा है और लोग इसे पिता के प्रति उनके प्यार की मिसाल बता रहे हैं।
जैसे ही यह पूरा मामला लोगों तक पहुंचा सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। लोग इसे पिता और बेटियों के रिश्ते की मिसाल बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि, आज के समय में जहां रिश्तों को लेकर अलग-अलग बातें सुनने और देखने को मिलती हैं वहां यह परिवार, संस्कार और निस्वार्थ प्रेम का एक जीता-जागता उदाहरण है।
विज्ञापन