क्या दिवाली पर उत्तर प्रदेश के अयोध्या, काशी और मथुरा को बम धमाकों से दहलाने की साजिश रची जा रही है ? जानिए दीपावली से पहले उत्तर प्रदेश में मिले धमकी भरे ई-मेल, सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई और अयोध्या, वाराणसी व मथुरा में बढ़ाई गई सतर्कता से जुड़ी पूरी खबर।

UP News : उत्तर प्रदेश में दीपावली के त्योहार से ठीक पहले धमकी भरे ई-मेल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रदेश के तीन प्रमुख धार्मिक शहरों अयोध्या, वाराणसी (काशी) और मथुरा को बम धमाकों के जरिए निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इतना ही नहीं, स्कूलों और सरकारी संस्थानों को भी धमकी भरे संदेश भेजे गए हैं। इन संदेशों में बच्चों को स्कूल नहीं भेजने और मंदिरों में नहीं जाने की चेतावनी दी गई है। धमकी भरे ई-मेल में 8 नवंबर से 27 नवंबर 2026 के बीच बम धमाकों की बात कही गई है। संदेश में कथित तौर पर 'खालिस्तान नेशनल आर्मी' का नाम इस्तेमाल किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस, साइबर सेल और यूपी एटीएस जांच में जुट गई हैं। अयोध्या, वाराणसी और अन्य प्रभावित स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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धमकी भरे ई-मेल में उत्तर प्रदेश के तीन ऐसे शहरों का नाम लिया गया है, जिनका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है। अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है। यहां श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और दीपोत्सव के आयोजन के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है। वाराणसी में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा के घाट देश-विदेश के श्रद्धालुओं के प्रमुख आकर्षण हैं। वहीं मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ई-मेल में इन शहरों के मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। इसके अलावा स्कूलों को भी संदेश भेजकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी दी गई है।
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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, धमकी भरे संदेशों में 8 नवंबर को दीपावली के दिन धमाकों की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही 27 नवंबर तक हमलों का सिलसिला जारी रहने की बात भी लिखी गई है। ई-मेल में 'काली दिवाली' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। संदेश में 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए 'खून का बदला खून' जैसे भड़काऊ शब्द भी लिखे गए हैं। ई-मेल भेजने वालों ने अपने संदेश में खालिस्तान समर्थक नारे और कथित संगठन का नाम इस्तेमाल किया है। हालांकि, केवल ई-मेल में किसी संगठन का नाम लिखे होने से यह साबित नहीं होता कि धमकी वास्तव में उसी संगठन ने दी है। सुरक्षा एजेंसियां संदेश भेजने वाले की वास्तविक पहचान और इसके पीछे की साजिश की जांच कर रही हैं।
इस मामले में सामने आई एक महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि धमकी केवल धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं रही। अयोध्या में आईसीएसई बोर्ड से संचालित एक स्कूल को धमकी भरा ई-मेल मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा अंबेडकर नगर के दो स्कूलों को भी इसी तरह के संदेश भेजे जाने की खबर है। अयोध्या जिला न्यायालय की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर भी धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला न्यायालय को 8 नवंबर को बम धमाके की धमकी दी गई थी। इसमें वाराणसी और मथुरा के धार्मिक स्थलों तथा वाराणसी के स्कूलों का भी उल्लेख किया गया था। इस घटनाक्रम के बाद जिला न्यायालय की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीयूष त्रिपाठी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर न्यायालय परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा।
वाराणसी में भी धमकी भरे ई-मेल मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने बताया कि वाराणसी में पहले से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। धमकी भरे ई-मेल सामने आने के बाद अतिरिक्त सतर्कता के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस आयुक्त कार्यालय, नगर निगम, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और अन्य सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के आधिकारिक ई-मेल पर भी अज्ञात आईडी से धमकी भरे संदेश प्राप्त हुए। इसके बाद संबंधित स्थानों पर पुलिस पहुंची और ई-मेल से जुड़ी जानकारियां जुटाई गईं। वाराणसी में मंदिरों, गंगा घाटों और शहर की सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई गई है। होटल संचालकों को आने वाले लोगों की पहचान संबंधी जानकारी की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। बाजारों में पुलिस बल की तैनाती और यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
धमकी भरे ई-मेल का मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने तकनीकी स्तर पर भी पड़ताल शुरू कर दी है। अयोध्या की साइबर सेल और उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (यूपी एटीएस) इस मामले की जांच में जुटे हैं। जांच का प्रमुख उद्देश्य ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति या नेटवर्क की पहचान करना है। इसके लिए संबंधित ई-मेल आईडी, आईपी एड्रेस और अन्य तकनीकी जानकारियों की पड़ताल की जा रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि अलग-अलग शहरों और संस्थानों को भेजे गए संदेशों के पीछे एक ही व्यक्ति या समूह है अथवा इसके पीछे कोई अलग नेटवर्क काम कर रहा है।
फिलहाल धमकी की वास्तविकता और ई-मेल भेजने वालों की पहचान को लेकर जांच जारी है।
अयोध्या जिला न्यायालय को मिली धमकी के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुरक्षा को लेकर विशेष इंतजाम करने की मांग की है।
इसमें प्रमुख रूप से निम्नलिखित कदम शामिल हैं:
पुलिस ने न्यायालय परिसर के प्रवेश द्वारों पर जांच की और सुरक्षा उपकरणों की कार्यशीलता भी देखी।
अयोध्या जिला न्यायालय की सुरक्षा का विषय नया नहीं है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2007 में फैजाबाद कचहरी में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे, जिनमें कई लोगों की जान गई थी।
इसके बाद भी न्यायालय परिसर को कई बार धमकियां मिल चुकी हैं। फरवरी 2026 में भी परिसर में बम लगाए जाने की धमकी के बाद कचहरी खाली करानी पड़ी थी।
ऐसे में दीपोत्सव और दीपावली के समय दोबारा धमकी मिलने से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
उत्तर प्रदेश में दीपावली का त्योहार केवल घरों और बाजारों तक सीमित नहीं रहता। अयोध्या, वाराणसी और मथुरा जैसे शहरों में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ जाती है। अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या रहती है। मथुरा और वृंदावन में भी धार्मिक गतिविधियां तेज रहती हैं। ऐसे में धमकी भरे ई-मेल के बाद मंदिरों, स्कूलों, न्यायालयों और अन्य सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी हो गई है।
इस घटनाक्रम के बीच आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। किसी भी संदिग्ध वस्तु, लावारिस बैग या असामान्य गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देनी चाहिए। सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि के धमकी भरे ई-मेल या सुरक्षा से जुड़ी अप्रमाणित सूचनाएं साझा करने से बचना चाहिए। किसी भी आपात स्थिति में 112 पर पुलिस को सूचना दी जा सकती है।
दीपावली से पहले अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे धार्मिक शहरों को निशाना बनाने की धमकी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। स्कूलों, न्यायालयों और सरकारी संस्थानों तक धमकी भरे संदेश पहुंचने से जांच का दायरा भी बढ़ गया है। अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन ई-मेल के पीछे कौन है? क्या यह किसी संगठित नेटवर्क की साजिश है या फिर दहशत फैलाने के उद्देश्य से भेजे गए फर्जी संदेश हैं? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस और जांच एजेंसियों के सामने चुनौती है कि धमकी के स्रोत का पता लगाएं और दीपावली के दौरान आम नागरिकों, श्रद्धालुओं तथा सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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