
UP Election 2022 वेस्ट यूपी, खासकर सहारनपुर और आसपास के जनपदों में दो खास दिग्गज राजनीति में अपनी खासी पहचान रखते थे। इन दोनों दिग्गजों की एक आवाज पर हजारों लोग पीछे पीछे हो जाते थे। अब यह दोनों ही दिग्गज इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत को बचाए रखने के लिए उनके वारिस उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं। उनके सामने इस बार भी विरासत बचाने की कड़ी चुनौती है। देखना है कि कौन विरासत को बचाने में कामयाब रह पाता है।
विधानसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक दिग्गजों के परिजन मैदान में हैं, इनमें सहारनपुर के दिग्गज नेता रहे काजी रशीद मसूद के भतीजे नोमान मसूद और चौधरी यशपाल सिंह के बेटे भी चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों गंगोह सीट से ही ताल ठोक रहे हैं। खास बात यह है कि काजी रशीद मसूद नौ बार सांसद और एक बार केन्द्रीय मंत्री रहे थे। उनका पूरे 50 साल तक वेस्ट यूपी के साथ ही देश की राजनीति में साधी दखल रहता था।
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UP Election 2022[/caption]
वहीं, सियासत की दूसरी धुरी चौधरी यशपाल सिंह रहे थे। वह चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे। वह प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। वह पहली बार नकुड़ से वर्ष 1962 में विधायक चुने गए। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका भी करीब 50 साल तक सियासत में सीधा दखल रहा। इस तरह दोनों नेताओं की लंबी सियासी पारी रही।
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वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उनकी नई पीढ़ी उतर रही है। काजी रशीद मसूद के भतीजे नोमान मसूद गंगोह विधान सभा सीट से बसपा के प्रत्याशी हैं। हालांकि इससे पहले वह रालोद में थे। वहां से टिकट मिलता नहीं दिखाई दिया तो बसपा में आ गए। यहां आते ही उन्हें टिकट थमा दिया गया। इससे पहले भी नोमान मसूद दो बार चुनाव मैदान में उतर चुके हैं, लेकिन दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर चौधरी यशपाल सिंह के बेटे चौधरी इंद्रसेन भी चुनाव मैदान में हैं। वह भी गंगोह से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि इंद्रसेन भी इससे पहले चुनाव हार चुके हैं। दोनों में कांटे की टक्कर है।