UP News: CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि जिस प्रकार यह परम सत्य है कि सूरज प्रतिदिन पूर्व दिशा से निकलता है उसी प्रकार यह भी परम सत्य है कि भारत का चुनाव आयोग पूरी तरह से पारदर्शी है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के दौरे से यह चर्चा तेज हो गई है कि किसी भी दिन उत्तर प्रदेश में विधानसभा के चुनाव की घोषणा कर दी जाएगी। उत्तर प्रदेश में CEC ज्ञानेश कुमार ने अपने दौरे में बड़ा दावा कर दिया है। CEC ज्ञानेश कुमार ने प्रदेश में विधानसभा के आगामी चुनाव के तारीखों के विषय में कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया।
भारत के CEC ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश का दो दिवसीय दौरा 25 अगस्त 2026 को पूरा हो गया है। इस दौरान CEC ज्ञानेश कुमार ने कहा है कि जिस प्रकार यह परम सत्य है कि सूरज प्रतिदिन पूर्व दिशा से निकलता है उसी प्रकार यह भी परम सत्य है कि भारत का चुनाव आयोग पूरी तरह से पारदर्शी है। चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाने वालों के अपने निहित स्वार्थ हैं। भारत के CEC ज्ञानेश कुमार ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा के आगामी चुनाव की तारीखों के विषय में कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। इस बीच अनेक राजनीतिक विश्लेषक दावा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव तय समय से पहले भी हो सकते हैं।
इससे पहले 24 अगस्त को CEC ज्ञानेश कुमार को उत्तर प्रदेश की युवा पीढ़ी GenZ से सीधा संवाद किया। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची, नोटा, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और देश में एक मतदाता सूची से सभी चुनाव कराने जैसे कई तीखे सवाल पूछे। सीईसी ने युवाओं के सवालों का खुलकर जवाब दिया और उनके सवाल पूछने के अंदाज तथा जागरूकता की सराहना की। ज्ञानेश कुमार ने उत्तर प्रदेश के मतदाताओं से अपील की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदान का ऐसा रिकॉर्ड बनाया जाए जो देश के लिए मिसाल बने। उन्होंने पश्चिम बंगाल में दर्ज 93.7 प्रतिशत मतदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को अगले विधानसभा चुनाव में इस रिकॉर्ड को तोड़ने का प्रयास करना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने 20 जिलों के शैक्षिक संस्थानों से आए शिक्षकों और छात्रों के साथ संवाद किया। यह कार्यक्रम मतदाता साक्षरता क्लब (ईएलसी-2) और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआईनेट को लेकर आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। अधिक से अधिक लोग मतदान केंद्र तक पहुंचें और अपने मताधिकार का इस्तेमाल करें। सीईसी ने युवाओं को चुनाव प्रक्रिया में जागरूक भागीदारी के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सामने 2027 में मतदान का नया रिकॉर्ड बनाने का अवसर है।
कार्यक्रम में जेन-जी के एक सवाल ने देश में लोकसभा, विधानसभा, पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची की व्यवस्था को लेकर बहस को सामने ला दिया। इस पर ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था में सभी चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची का इस्तेमाल संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि संविधान के 73वें संशोधन के तहत राज्यों में राज्य निर्वाचन आयोगों की व्यवस्था है। पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची तैयार करने की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोगों की होती है। ऐसे में जब तक संवैधानिक या कानूनी व्यवस्था में बदलाव नहीं किया जाता, चुनाव आयोग अपने स्तर पर सभी चुनावों के लिए एक मतदाता सूची बनाकर चुनाव नहीं करा सकता।
युवाओं ने सीईसी से नोटा को लेकर भी सीधा सवाल किया। पूछा गया कि यदि किसी चुनाव में सभी प्रत्याशियों को मिले वोटों की तुलना में NOTA यानी 'इनमें से कोई नहीं' को सबसे ज्यादा वोट मिल जाएं तो चुनाव आयोग क्या करेगा? ज्ञानेश कुमार ने कहा कि अभी तक ऐसी स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने युवाओं की जागरूकता का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि जागरूक मतदाताओं के रहते ऐसी स्थिति पैदा नहीं होगी। यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनावों में उम्मीदवारों को लेकर मतदाताओं की असहमति जताने के लिए NOTA का विकल्प उपलब्ध है।
जेन-जी ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर लगाए जाने वाले आरोपों पर भी सीईसी से सवाल किया। पूछा गया कि जब चुनाव आयोग पर बिना साक्ष्य और आधार के आरोप लगाए जाते हैं तो आयोग कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं करता?
इस पर ज्ञानेश कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग आरोपों से डरने या घबराने के बजाय उन्हें चुनौती के रूप में स्वीकार करता है और अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर देता है। सीईसी ने कहा कि भारत में मतदान प्रतिशत अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और जापान जैसे कई विकसित देशों की तुलना में अधिक है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता को लोकतंत्र की मजबूती का महत्वपूर्ण आधार बताया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने मतदाता सूची में लगातार होने वाले बदलावों की जानकारी भी युवाओं के साथ साझा की। उन्होंने बताया कि देश में करीब 97 करोड़ मतदाता हैं। बड़ी आबादी और लगातार होने वाले स्थानांतरण, मृत्यु तथा नए मतदाताओं के जुड़ने के कारण मतदाता सूची में हर वर्ष बड़े स्तर पर बदलाव होता है। उन्होंने बताया कि हर साल करीब आठ से दस प्रतिशत तक मतदाता सूची में बदलाव की स्थिति बनती है। लगभग दो करोड़ लोगों की मृत्यु होती है, करीब चार करोड़ युवा और अन्य नए मतदाता जुड़ते हैं जबकि लगभग चार करोड़ लोग अपना घर या निवास स्थान बदलकर दूसरी जगह चले जाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को उन्होंने यह कहते हुए समझाया कि औसतन हर सेकंड करीब तीन मतदाताओं की स्थिति बदल जाती है।
सीईसी ने नागरिकों से मतदाता सूची में अपना नाम, पता और अन्य विवरण जांचने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची या वोटर कार्ड में कोई गलती है तो उसे समय रहते ठीक कराया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से मतदाता साक्षरता क्लब (ईएलसी-2) और ईसीआईनेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का भी आह्वान किया। चुनाव आयोग का उद्देश्य युवाओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने के साथ उन्हें मतदाता अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना है।
कॉल्विन तालुकेदार्स इंटर कॉलेज के कक्षा 12 के छात्र आदित्य ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त से पूछा कि भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में इतने बड़े स्तर पर चुनाव इतने सुचारू तरीके से कैसे संचालित किए जाते हैं और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता किस तरह सुनिश्चित होती है? ज्ञानेश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया को संचालित करने वाले डिजिटल सिस्टम और तकनीकी व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक ने देश में चुनावी व्यवस्था के संचालन को काफी व्यवस्थित किया है। उन्होंने युवाओं को समझाया कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, जागरूकता और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी मिलकर लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सीईसी का जेन-जी के साथ सीधा संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़ी संख्या में युवा पहली बार मतदान करने वाले होंगे। चुनाव आयोग की कोशिश है कि नए मतदाताओं को न केवल मतदाता सूची में जोड़ा जाए, बल्कि उन्हें मतदान के महत्व और चुनावी प्रक्रिया की भी पूरी जानकारी दी जाए। लखनऊ में हुए इस संवाद में जिस तरह युवाओं ने चुनाव आयोग से सीधे और तीखे सवाल किए उससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी चुनावी प्रक्रिया को लेकर अधिक जानकारी चाहती है और वह केवल मतदान करने तक सीमित नहीं रहना चाहती। 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के सामने अब एक बड़ी चुनौती मतदान प्रतिशत बढ़ाने की भी होगी। सीईसी ज्ञानेश कुमार ने 93.7 प्रतिशत के रिकॉर्ड का लक्ष्य सामने रखकर प्रदेश के करोड़ों मतदाताओं, खासकर युवाओं, को एक स्पष्ट संदेश दिया है-लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जागरूक मतदाता की है।
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