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उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज होती दिख रही है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ इस बार अपनी रणनीति को और ज्यादा जमीनी स्तर पर ले जाने में जुटा है।

UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी अभी से तेज होती दिख रही है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया ब्लॉक’ इस बार अपनी रणनीति को और ज्यादा जमीनी स्तर पर ले जाने में जुटा है। विपक्ष का फोकस आरक्षण, सामाजिक न्याय और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत कर 2024 लोकसभा चुनाव जैसी सफलता दोहराने पर है। सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों की कोशिश है कि सेकुलर और PDA वोट बैंक में किसी भी तरह की टूट न हो। इसके लिए ‘माइक्रो लेवल मैनेजमेंट’ की रणनीति अपनाई जा रही है, जिसके तहत अलग-अलग सामाजिक समूहों तक उनके ही समुदाय के नेताओं के जरिए सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। UP News
उत्तर प्रदेश में दलित आबादी लगभग 20 से 21 प्रतिशत मानी जाती है, जिसे ध्यान में रखते हुए विपक्ष ने इस वर्ग के भीतर भी सूक्ष्म रणनीति तैयार की है। खास तौर पर पासी समाज (लगभग 5 प्रतिशत आबादी) को साधने के लिए उसी समाज के नेताओं को सक्रिय किया गया है, ताकि संदेश अधिक प्रभावी तरीके से जमीनी स्तर तक पहुंचे। इसी तरह पिछड़े वर्गों के भीतर भी छोटे-छोटे सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे वोट बैंक का एकीकरण बना रहे। UP News
विपक्षी दलों के लिए मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से अहम रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों इस वोट बैंक को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। कोशिश यह भी है कि यह वोट किसी अन्य राजनीतिक विकल्प की ओर न खिसके। हालांकि इसी बीच AIMIM भी सक्रिय भूमिका में नजर आ रही है और मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व का दावा है कि उनका वोट बैंक बीजेपी की ओर नहीं जाएगा और वे चुनावी मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतर रहे हैं। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी विपक्ष की इन रणनीतियों को ज्यादा प्रभावी नहीं मानती। भाजपा नेताओं का दावा है कि विपक्ष चाहे जितनी रणनीति बना ले, उत्तर प्रदेश की जनता एक बार फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर भरोसा जताएगी। UP News
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