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प्रजापति समाज ने भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूती से दर्ज कराने की कवायद तेज कर दी है। प्रजापति कम्युनिटी सर्विस फाउंडेशन (PCSF) ने देशभर में समुदाय को संगठित कर उसे एक निर्णायक राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का अभियान शुरू किया है।

UP News : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 और लोकसभा चुनाव 2029 की तैयारियों के बीच प्रजापति समाज ने भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी को मजबूती से दर्ज कराने की कवायद तेज कर दी है। प्रजापति कम्युनिटी सर्विस फाउंडेशन (PCSF) ने देशभर में समुदाय को संगठित कर उसे एक निर्णायक राजनीतिक ताकत के रूप में स्थापित करने का अभियान शुरू किया है। संगठन का दावा है कि अब प्रजापति समाज केवल चुनावी समीकरणों का हिस्सा बनकर नहीं रहेगा, बल्कि टिकट वितरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में अपनी आबादी के अनुरूप हिस्सेदारी की मांग करेगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी चुनावों में उसका समर्थन उसी राजनीतिक दल को मिलेगा, जो प्रजापति समाज को सम्मानजनक भागीदारी और पर्याप्त टिकट देने की पहल करेगा। UP News
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पीसीएसएफ का दावा है कि देशभर में प्रजापति समाज की आबादी करीब 9 करोड़ है। इसी आधार पर संगठन ने भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत कई प्रमुख राजनीतिक दलों से विधानसभा और लोकसभा चुनावों में आबादी के अनुपात में टिकट देने की मांग की है। संगठन के अनुसार, इस संबंध में विभिन्न दलों को पत्र भी भेजे गए हैं। साथ ही यह दावा भी किया गया है कि इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ कई दौर की चर्चा हुई है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य किसी एक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि समाज को उसकी राजनीतिक भागीदारी के अनुरूप प्रतिनिधित्व दिलाना है। प्रजापति समुदाय देश के अलग-अलग राज्यों में प्रजापति, कुम्हार, कुंभार, कुमावत और कुलाल जैसे नामों से जाना जाता है। अधिकांश राज्यों में यह समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में शामिल है, जबकि कुछ राज्यों में इसकी सामाजिक श्रेणी अलग-अलग है। संगठन का मानना है कि अलग-अलग पहचान के कारण समुदाय की राजनीतिक ताकत बिखरी हुई है। इसलिए पूरे देश के प्रजापति समाज को एक साझा मंच पर लाकर उसकी राजनीतिक आवाज को मजबूत करना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है। UP News
इसी रणनीति के तहत दिल्ली में नेतृत्व प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली और गोवा सहित कई राज्यों से संभावित राजनीतिक उम्मीदवारों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को चुनाव प्रबंधन, संगठन विस्तार, जनसंपर्क और जमीनी नेतृत्व विकसित करने का प्रशिक्षण दिया गया। संगठन का कहना है कि आगामी चुनावों से पहले प्रत्येक राज्य में मजबूत स्थानीय नेतृत्व तैयार करना उसकी प्राथमिकता है, ताकि समाज की राजनीतिक उपस्थिति और प्रभाव दोनों बढ़ाए जा सकें। UP News
पीसीएसएफ के अध्यक्ष राजेश प्रजापति के अनुसार, बड़ी आबादी होने के बावजूद समुदाय को अब तक अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि संगठन का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि पंचायत से लेकर संसद तक समाज का प्रभावी नेतृत्व तैयार करना है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संगठन ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कम से कम 20 संभावित उम्मीदवारों को तैयार करने और उनका समर्थन करने की योजना बनाई है। वहीं 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए भी पांच संभावित उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें राजनीतिक रूप से तैयार करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। संगठन का मानना है कि यदि देशभर में फैले प्रजापति समाज को एक साझा राजनीतिक पहचान के साथ संगठित किया जाता है, तो आने वाले वर्षों में यह समुदाय चुनावी रणनीतियों, टिकट वितरण और राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच सकता है। UP News
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