राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की आरक्षण को लेकर की गई टिप्पणी के बाद बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दोनों नेताओं ने आरक्षण को सामाजिक बराबरी और वंचित वर्गों के अधिकारों से जोड़ते हुए केंद्र और संघ पर निशाना साधा है। मोहन भागवत के बयान के बाद शुरू हुई यह सियासी हलचल इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या आरक्षण का मुद्दा 2027 के चुनाव में विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है। राजनीतिक गलियारों में इसकी तुलना 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरक्षण को लेकर बने माहौल से भी की जा रही है। UP News
बसपा प्रमुख मायावती ने मोहन भागवत की टिप्पणी पर सोशल मीडिया के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को लेकर क्रीमी लेयर की बहस संविधान में आरक्षण की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। मायावती के मुताबिक एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण केवल आर्थिक लाभ का विषय नहीं है, बल्कि सामाजिक बराबरी, सम्मान और अधिकार से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक भेदभाव और जातिगत असमानता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, इसलिए आरक्षण की जरूरत भी बनी हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि एससी और एसटी वर्ग के हितों से जुड़े मामलों में अदालत के सामने मजबूत तरीके से अपना पक्ष रखा जाए। मायावती ने यह भी कहा कि आरक्षण को राजनीतिक बहस का विषय बनाने के बजाय संविधान की सामाजिक न्याय की भावना के अनुरूप लागू किया जाना चाहिए। UP News
नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने भी मोहन भागवत के बयान को लेकर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने आरक्षण की राजनीति को मंडल बनाम कमंडल के पुराने राजनीतिक विमर्श से जोड़ते हुए सवाल उठाए। चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किए जाने के दौर में धार्मिक मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता दी गई। उन्होंने कहा कि जब भी पिछड़े, दलित और वंचित वर्ग अपने अधिकारों की मांग करते हैं, तब राजनीतिक बहस का रुख दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ दिया जाता है। उन्होंने सरकार से मंडल आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने की मांग की और कहा कि सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। UP News
आरक्षण पर मोहन भागवत की टिप्पणी के बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव का उदाहरण भी राजनीतिक चर्चा में आ गया है। उस समय भागवत ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत की बात कही थी। इसके बाद आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने चुनाव अभियान में इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। लालू यादव और उनके सहयोगियों ने आरोप लगाया था कि बीजेपी और संघ आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करना चाहते हैं। यह मुद्दा चुनावी माहौल में काफी प्रभावी रहा और महागठबंधन ने बिहार में बड़ी जीत दर्ज की थी। हालांकि, मौजूदा उत्तर प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां बिहार से अलग हैं। फिर भी आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे के चुनावी प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक दल इस बयान को अपने-अपने तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकते हैं। UP News
उत्तर प्रदेश में पिछड़े, दलित और आदिवासी वर्गों से जुड़े मुद्दे पहले से ही राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में संविधान और आरक्षण को लेकर विपक्ष ने बीजेपी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को अपने चुनावी संदेश का हिस्सा बनाया था। अब मोहन भागवत के बयान के बाद मायावती और चंद्रशेखर आजाद की सक्रियता से यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में आरक्षण फिर प्रमुख चुनावी मुद्दा बनेगा। बसपा लंबे समय से दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों को अपनी राजनीति का प्रमुख आधार बनाती रही है, जबकि चंद्रशेखर आजाद भी सामाजिक न्याय और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर मुखर रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की प्रतिक्रिया को आगामी चुनाव की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। UP News
मोहन भागवत ने छात्रों के साथ संवाद के दौरान आरक्षण से जुड़े सवाल पर कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के कारण सामाजिक स्तर पर कड़वाहट बढ़ी है। उनके मुताबिक आरक्षण की मूल भावना सामाजिक एकता और भेदभाव से प्रभावित वर्गों को आगे बढ़ाने से जुड़ी थी। भागवत ने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की सोच के अनुसार सामाजिक भेदभाव समाप्त होने तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आरक्षण का उद्देश्य वंचित वर्गों का उत्थान करना है और इसे लेकर राजनीति के बजाय सामाजिक सहमति बनाने की जरूरत है। उन्होंने उप-वर्गीकरण की मांग का भी उल्लेख किया और कहा कि आरक्षण का लाभ उन लोगों तक भी पहुंचना चाहिए, जिन्हें अभी इसका पर्याप्त लाभ नहीं मिला है। UP News
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी, सपा, कांग्रेस, बसपा और अन्य दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं। ऐसे में आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है। मोहन भागवत की टिप्पणी पर मायावती और चंद्रशेखर आजाद की प्रतिक्रिया ने इस बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि विपक्षी दल इस मुद्दे को किस स्तर तक चुनावी अभियान में ले जाते हैं और बीजेपी इसका जवाब किस राजनीतिक रणनीति के साथ देती है। UP News
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