
UP elections 2022 इस बार चुनाव प्रचार कुछ फीका फीका सा नजर आ रहा है। चुनावी रैलियों को संबोधित करने के लिए हेलिकॉप्टर में सवार होकर आने वाले नेताओं की धमक भी कम ही नजर आ रही है। चुनाव प्रचार के लिए आकाश में उड़ते हेलिकॉप्टर भी नजर नहीं आ रहे हैं। आखिर इस बार ऐसा क्यों हो रहा है, आईए जानते हैं... कोरोना वायरस के चलते चुनाव आयोग द्वारा विशेष दिशा निर्देश जारी कर चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन प्रतिबंधों के कारण ही हेलिकॉप्टर व चॉपर कंपनियों में उदासी छाई हुई है। चुनावी रैलियों पर रोक लगने के बाद किसी भी पार्टी का स्टार प्रचारक कहीं रैली नहीं कर रहा है।
आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने 31 जनवरी 2022 तक चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। जबकि 20 हेलिकॉप्टर और 10 चार्टेड प्लेन राजनीतिक दलों ने बुक कर रखी थी। रोटरी विंग सोसाइटी ऑफ इंडिया के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष उदय गिली ने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि हेलिकॉप्टर चार्टर ऑपरेटर के बीच थोड़ी सी उदासी है।
Read Also- 7th Pay Commission केंद्रीय कर्मचारियों को मिल सकता है नववर्ष का ये तोहफाचार्टर कंपनी एमएएबी एवियेशन प्राइवेट लिमिटेड के मालिक मंदर भारदे ने कहा कि यूपी चुनाव की खूबसूरती यह है कि वहां के नेता 20 से 30 किलोमीटर की छोटी यात्रा करने के लिए भी हेलिकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि हेलिकॉप्टर अपने आप में एक बड़ा प्रचार है जो स्थानीय लोगों को रैलियों तक खींच लाता है। 80 फीसदी से ज्यादा लोग पोडियम के मुकाबले हैलिपैड के पास मौजूद होते हैं।
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UP elections 2022 चुनाव प्रचार से इस बार दूर क्यों है हेलिकॉप्टर?[/caption]
मंदर भारदे ने बताया कि मौजूदा वक्त में अगस्तावेस्टलैंड-139 हेलकॉप्टर में एक बार में 14 से 16 लोग सवार हो सकते हैं। वहीं वीवीआईपी दौरे के दौरान उसमें केवल 6 लोग बैठते हैं। साढ़े चार लाख रुपये प्रति घंटा का चार्ज लगता है। जबकि इसकी बुकिंग दो महीने के लिए कम से कम 100 घंटे की बुकिंग होती है। इस दौरान एक ऑपरेटर कम से कम प्रति चुनाव चार से पांच करोड़ रुपये कमाता है। साथ ही यह भी बताया कि सिंगल इंजन वाले चॉपर भी 1.3 लाख प्रति घंटा चार्ज करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रचार कर रहे नेता पायलट को गांव के ऊपर-ऊपर दो से तीन राउंड लगाने को भी कहते हैं।