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UP News: इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने निर्धारित समय के भीतर यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। यही वजह है कि ऐसे कर्मचारियों का वेतन मार्च महीने से रोका गया हुआ है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने उन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है जिन्होंने अब तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण दर्ज नहीं किया है। ऐसे कर्मचारियों को पहले ही पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है और अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की तैयारी भी शुरू हो गई है। कार्मिक विभाग ने इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं।
कार्मिक विभाग की ओर से जारी शासनादेश में कहा गया है कि जिन कर्मचारियों ने अब तक अपनी संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है उनके खिलाफ संबंधित विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई करें। साथ ही की गई कार्रवाई की जानकारी शासन को भी उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद ही ऐसे कर्मचारियों के रुके हुए वेतन के संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में करीब 5,000 कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें पिछले चार महीनों से वेतन नहीं मिला है।
राज्य सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों को अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य कर्मचारियों की संपत्ति संबंधी जानकारी को ऑनलाइन रिकॉर्ड में लाना था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने निर्धारित समय के भीतर यह जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। यही वजह है कि ऐसे कर्मचारियों का वेतन मार्च महीने से रोका गया हुआ है।
कार्मिक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिन कर्मचारियों ने अभी तक अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं किया है उनमें अधिकांश कर्मचारी समूह ‘ग’ और समूह ‘घ’ श्रेणी से जुड़े हैं। चार महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को आवश्यक कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं ताकि आगे वेतन जारी करने की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
राज्य कर्मचारियों के लिए संपत्ति का ब्योरा जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी 2026 तय की गई थी। हालांकि तय समय सीमा खत्म होने के बाद भी 47,816 कर्मचारियों ने अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर दर्ज नहीं किया था। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों को एक और मौका देते हुए 10 मार्च 2026 तक अतिरिक्त समय दिया, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जानकारी अपलोड नहीं की। अब ऐसे मामलों में नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है।
संपत्ति का विवरण जमा न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभिन्न प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसमें विभागीय कार्रवाई शुरू करना, चालू चयन वर्ष में पदोन्नति पर रोक लगाना, एसीपी (Assured Career Progression) का लाभ न देना और विदेश यात्रा या प्रतिनियुक्ति के लिए आवश्यक विजिलेंस क्लियरेंस रोकना शामिल है। सरकार का कहना है कि कर्मचारियों द्वारा निर्धारित समय के भीतर जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है और नियमों का पालन नहीं करने पर तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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