सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद प्रभात मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की और आज करोड़ों रुपये का स्टार्टअप खड़ा कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर एक किसान के बेटे ने वह कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े शहरों के लोग भी नहीं कर पाते। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद प्रभात मिश्रा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की और आज करोड़ों रुपये का स्टार्टअप खड़ा कर दिया है। उनकी सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।
प्रभात मिश्रा का बचपन उत्तर प्रदेश के साधारण किसान परिवार में बीता। गांव के माहौल में पले-बढ़े प्रभात ने बचपन से ही पढ़ाई और तकनीक में गहरी रुचि दिखाई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना हथियार बनाया और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।
पढ़ाई के दौरान ही उन्हें यह एहसास हुआ कि भविष्य की दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और नई तकनीकों से तय होने वाली है। इसी सोच ने उन्हें कुछ अलग करने की प्रेरणा दी।
प्रभात मिश्रा ने वर्ष 2019 में “उमागा एडुटेक (Umaga Edutech)” की स्थापना की। इस स्टार्टअप का उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों जैसे AI, रोबोटिक्स, डेटा साइंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की शिक्षा देना था। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन उनकी मेहनत और नई सोच ने कंपनी को तेजी से आगे बढ़ाया। आज उनकी कंपनी स्कूलों और कॉलेजों में इनोवेशन लैब और टेक्नोलॉजी प्रोग्राम चला रही है, जहां छात्रों को आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
कुछ ही वर्षों में प्रभात मिश्रा का स्टार्टअप तेजी से बढ़ा और अब यह लगभग 40 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंच चुका है। उनकी कंपनी ने कई शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी की है और हजारों छात्रों को नई तकनीक सीखने का मौका दिया है।
उमागा एडुटेक के जरिए अब तक
प्रभात मिश्रा की कंपनी सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि रिसर्च और इनोवेशन पर भी काम कर रही है। कंपनी के प्रोजेक्ट्स में ह्यूमनॉइड रोबोट और AI आधारित एप्लिकेशन विकसित करना भी शामिल है। उनका लक्ष्य आने वाले समय में देशभर के स्कूल-कॉलेजों में टेक्नोलॉजी लैब स्थापित करना और युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करना है।
प्रभात मिश्रा की कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो गांव से निकलकर भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। किसान के बेटे से टेक उद्यमी बनने तक का उनका सफर आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है। तकनीक और शिक्षा को जोड़कर उन्होंने यह दिखा दिया कि सपने बड़े हों तो छोटे शहर भी बड़ी सफलता की शुरुआत बन सकते हैं। UP News