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देशभर में चल रहे पोलियो उन्मूलन अभियान को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के दूषित पानी के नमूने में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (VDPV) टाइप-1 की पुष्टि हुई है।

UP News : देशभर में चल रहे पोलियो उन्मूलन अभियान को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद शहर स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के दूषित पानी के नमूने में वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियोवायरस (VDPV) टाइप-1 की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और तत्काल प्रभाव से निगरानी व रोकथाम की कार्रवाई तेज कर दी गई। UP News
स्वास्थ्य विभाग द्वारा पोलियो वायरस की निगरानी के तहत हर महीने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाते हैं। इसी क्रम में डूंडाहेड़ा एसटीपी से लिया गया सैंपल दिल्ली स्थित लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया था। सोमवार को प्राप्त रिपोर्ट में VDPV टाइप-1 की पुष्टि हुई, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए तत्काल एक्शन प्लान तैयार किया। UP News
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ कार्यालय में विशेष समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में तय किया गया कि शहरी क्षेत्र के 12 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कुल 107 टीमें डोर-टू-डोर सर्वे करेंगी। ये टीमें आशा कार्यकर्ता, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मिलकर 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच करेंगी। साथ ही जिन बच्चों का टीकाकरण अधूरा है, उन्हें पोलियो ड्रॉप्स भी पिलाई जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने जिन इलाकों में विशेष सर्वे अभियान चलाने का निर्णय लिया है, उनमें राजनगर, शास्त्रीनगर, बुलंदशहर रोड औद्योगिक क्षेत्र, दौलतपुरा, न्यू पंचवटी, घुकना, हिंडन विहार, कैला भट्टा, मिर्जापुर, विजय नगर (सेक्टर-1 और 2) तथा खैराती नगर शामिल हैं। UP News
विशेषज्ञों के अनुसार, वैक्सीन-व्युत्पन्न पोलियो वायरस उन बच्चों में सक्रिय हो सकता है जिनका टीकाकरण पूर्ण नहीं हुआ है या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। यह वायरस दूषित वातावरण, संक्रमित मल और खराब स्वच्छता व्यवस्था के माध्यम से सीवरेज सिस्टम तक पहुंच सकता है और वहां से फैलने की आशंका रहती है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस गंभीर स्थिति में बच्चों में लकवा (paralysis) का कारण बन सकता है। संक्रमण का खतरा उन क्षेत्रों में अधिक होता है जहां स्वच्छता व्यवस्था कमजोर हो और टीकाकरण कवरेज कम हो। UP News
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आर.के. गुप्ता ने बताया कि मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग ने रोकथाम की कार्रवाई तेज कर दी है और हर संभावित क्षेत्र में बच्चों की जांच की जा रही है ताकि संक्रमण के स्रोत का पता लगाया जा सके और उसे नियंत्रित किया जा सके। UP News
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