उत्तर प्रदेश सरकार की नीति निर्धारण कमेटी (यूपी कैबिनेट) ने गंगा एक्सप्रेसवे को सीधे हरिद्वार के साथ जोड़ने का प्रस्ताव पास कर दिया है। गंगा एक्सप्रसवे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे बनने का गौरव पहले ही हासिल कर चुका है।

UP News : उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला किया है। उत्तर प्रदेश सरकार की नीति निर्धारण कमेटी (यूपी कैबिनेट) ने गंगा एक्सप्रेसवे को सीधे हरिद्वार के साथ जोड़ने का प्रस्ताव पास कर दिया है। गंगा एक्सप्रसवे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे बनने का गौरव पहले ही हासिल कर चुका है। अब गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्स उत्तराखंड के साथ जोड़ने की योजना पास होने से उत्तर प्रदेश में विकास की गति को नए पंख लगेंगे। UP News
आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश के सबसे लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को अब पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के हरिद्वार तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी गई है। इस विस्तार के बाद प्रयागराज से मेरठ होते हुए हरिद्वार तक करीब 724 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर तैयार होगा। यानी आने वाले समय में प्रयागराज और हरिद्वार जैसे दो बड़े धार्मिक शहरों के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी का नया रास्ता खुलेगा। यह फैसला उत्तर प्रदेश के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी स्तर पर मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे को पहले से प्रस्तावित परियोजनाओं में शामिल किया गया है। यूपीडा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मेरठ-हरिद्वार एक्सप्रेसवे को प्रस्तावित परियोजना के तौर पर दर्ज किया गया है। UP News
मौजूदा गंगा एक्सप्रेसवे करीब 594 किलोमीटर लंबा है। यह मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों को जोड़ता है। यूपीडा के अनुसार मौजूदा परियोजना छह लेन की है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। अब इसके मेरठ से हरिद्वार विस्तार की मंजूरी मिलने के बाद पूरे कॉरिडोर की लंबाई लगभग 724 किलोमीटर हो जाएगी। प्रस्तावित विस्तार करीब 130 किलोमीटर का बताया गया है। यानी गंगा एक्सप्रेसवे अब केवल उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाला मार्ग नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को सीधे उत्तराखंड से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। सरकार के फैसले के मुताबिक गंगा एक्सप्रेसवे को मेरठ से आगे हरिद्वार तक ले जाने के लिए नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित रूट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण क्षेत्रों से होकर उत्तराखंड की सीमा तक पहुंचेगा और फिर हरिद्वार से जुड़ेगा। रिपोर्टों के मुताबिक इस विस्तार की अनुमानित लंबाई करीब 130 किलोमीटर है। इस कनेक्टिविटी का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रयागराज से आने वाला यातायात पश्चिमी उत्तर प्रदेश होते हुए सीधे हरिद्वार तक पहुंच सकेगा। इससे दिल्ली-एनसीआर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच भी संपर्क मजबूत होगा। UP News
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार तक विस्तार धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रयागराज और हरिद्वार दोनों ही गंगा किनारे बसे प्रमुख धार्मिक शहर हैं और कुंभ के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। ऐसे में दोनों शहरों के बीच तेज सड़क संपर्क बनने से धार्मिक पर्यटन को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। श्रद्धालुओं के अलावा पर्यटन, परिवहन और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार की अनुमानित लागत करीब 10,761 करोड़ रुपये बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार इस परियोजना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दी है और आगे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा अन्य प्रक्रियाओं के आधार पर निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। इस परियोजना की खास बात यह भी है कि उत्तराखंड की सीमा में आने वाले हिस्से को लेकर भी उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से खर्च वहन करने का प्रस्ताव सामने आया है। UP News
गंगा एक्सप्रेसवे का हरिद्वार विस्तार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए भी बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकता है। मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर जैसे क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से औद्योगिक गतिविधियों, कृषि उत्पादों की आवाजाही और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलने की संभावना है। गन्ना, चीनी, गुड़, कृषि उत्पाद और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य उद्योगों के लिए उत्तराखंड के बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है। वहीं उत्तराखंड से आने वाले पर्यटन और धार्मिक यात्रियों को भी उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक तेज संपर्क मिलेगा। UP News
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार एक्सप्रेसवे नेटवर्क को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। यूपीडा की प्रस्तावित परियोजनाओं में जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेसवे को बुलंदशहर के रास्ते जोड़ने वाले लिंक एक्सप्रेसवे को भी शामिल किया गया है। ऐसे में आने वाले वर्षों में गंगा एक्सप्रेसवे का नेटवर्क केवल प्रयागराज-मेरठ-हरिद्वार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के दूसरे बड़े एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट कनेक्टिविटी नेटवर्क से भी जुड़ सकता है। गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक विस्तार के बाद प्रयागराज से हरिद्वार के बीच सड़क यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इसी वजह से इस परियोजना को धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क मजबूत करने वाली परियोजना के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि ‘सुबह हरिद्वार, शाम प्रयागराज’ जैसी यात्रा अवधि वास्तविक रूप से कब संभव होगी, यह एक्सप्रेसवे के नए विस्तार के निर्माण, इंटरचेंज, ट्रैफिक और निर्धारित गति सीमा पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल इसे परियोजना की संभावित सुविधा के रूप में देखना उचित होगा, न कि निश्चित यात्रा समय के रूप में। उत्तर प्रदेश पहले ही देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। गंगा एक्सप्रेसवे के मौजूदा 594 किलोमीटर के कॉरिडोर का अप्रैल 2026 में उद्घाटन हो चुका है। यूपीडा के अनुसार यह परियोजना मेरठ से प्रयागराज तक पूरी तरह नियंत्रित प्रवेश वाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है। अब हरिद्वार विस्तार की मंजूरी इस नेटवर्क को राज्य की सीमा से बाहर उत्तराखंड तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। UP News
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