उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भ्रष्टाचार पर कानून का चाबुक चला है। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकारी अधिकारी को सस्पेंड करने की यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर की गई है।

UP News : उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भ्रष्टाचार पर कानून का चाबुक चला है। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हुए उत्तर प्रदेश सरकार के एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है। सरकारी अधिकारी को सस्पेंड करने की यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर की गई है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के मामले में अनेक सरकारी अधिकारियों यहां तक कि IAS अधिकारियों तक को सस्पेंड कर चुकी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर दोहराया है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार जीरो टोलरेंस की नीति पर चल रही है। UP News
आपको बता दें कि शुक्रवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त तथा मनरेगा में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी संजय कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर की गई है। शासन का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में संजय पांडेय वित्तीय अनियमितताओं, मनरेगा कार्यों में लापरवाही तथा केंद्र और राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के दोषी पाए गए हैं। शासन के अनुसार, संजय कुमार पांडेय जब उन्नाव में उपायुक्त (स्वरोजगार), राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनात थे, उसी दौरान वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए। प्रारंभिक जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध मिलने के बाद सरकार ने तत्काल निलंबन का निर्णय लिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें आयुक्त, ग्राम्य विकास कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध किया गया है। UP News
सरकारी आदेश में कहा गया है कि 15 मार्च 2026 को मनरेगा लोकपालों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उनके कार्यकाल विस्तार अथवा नवीनीकरण से संबंधित कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया। इतना ही नहीं, संबंधित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा भारत सरकार के दिशा-निर्देशों और शासनादेशों के पालन में भी गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने संजय कुमार पांडेय के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की विस्तृत जांच के लिए लखनऊ मंडल के आयुक्त को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। शासन जल्द ही आरोपपत्र जारी करेगा, जिसके बाद विभागीय जांच आगे बढ़ेगी। UP News
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई को सरकार का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि मनरेगा जैसी करोड़ों रुपये की जनकल्याणकारी योजना में भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार का कहना है कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश सरकार ने विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों पर कई अधिकारियों के खिलाफ निलंबन, विभागीय जांच और अन्य कठोर कार्रवाई की है। मनरेगा के संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय का निलंबन इसी सख्त अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन स्थापित करने के लिए भ्रष्टाचार के मामलों में "जीरो टॉलरेंस" की नीति पर काम किया जा रहा है। UP News
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