उत्तर प्रदेश में सालों से खाली पड़ी सरकारी संपत्तियों को लेकर योगी सरकार ने नई तैयारी शुरू की है। क्या अब प्रदेश की करीब 30 हजार करोड़ रुपये की अटकी संपत्तियों की तस्वीर बदलने वाली है?

UP News : उत्तर प्रदेश में लंबे समय से बिक्री का इंतजार कर रही विकास प्राधिकरणों की हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों में करीब 30 हजार करोड़ रुपये की ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जिन्हें आवश्यक मरम्मत, रंगाई-पुताई, सुंदरीकरण और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के बाद दोबारा बाजार में उतारा जाएगा। इन संपत्तियों में आवासीय प्लॉट, फ्लैट, दुकान, आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां और स्कूलों के लिए आरक्षित भूखंड तक शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य वर्षों से अटकी इन संपत्तियों को आकर्षक बनाकर उनकी बिक्री बढ़ाना और विकास प्राधिकरणों में फंसी बड़ी पूंजी को बाहर निकालना है। UP News
मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के करीब 28 विकास प्राधिकरणों में ऐसी संपत्तियां मौजूद हैं, जो लंबे समय से बिक्री की प्रतीक्षा कर रही हैं। कई संपत्तियां पुरानी होने के कारण खरीदारों को आकर्षित नहीं कर पा रही हैं। अब सरकार ऐसी संपत्तियों को री-लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। जरूरत के अनुसार भवनों की मरम्मत, रंगाई-पुताई, बाहरी स्वरूप में सुधार तथा बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त कराया जाएगा। खाली प्लाटों के मामले में भी केवल जमीन बेचने के बजाय वहां उपलब्ध सुविधाओं को बेहतर तरीके से प्रदर्शित करने पर जोर दिया जाएगा। सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित करके संभावित खरीदारों के सामने संपत्ति का बेहतर स्वरूप रखा जाएगा। UP News
इस पूरी योजना में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) की संपत्तियां भी शामिल हैं। एमडीए की विभिन्न आवासीय योजनाओं में करीब 1000 करोड़ रुपये की संपत्तियां बिक्री के लिए शेष बताई गई हैं। सीतापुरी-दससराय, अमृत कुंज, उद्यम विहार, ढक्का क्षेत्र की अरावली योजना तथा प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई परियोजनाओं में प्लाट, फ्लैट, दुकान और अन्य संपत्तियां बिक्री की प्रतीक्षा में हैं। एमडीए की बड़ी पूंजी इन संपत्तियों में फंसी हुई है। हालात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले एक वर्ष में विभिन्न योजनाओं के करीब 60 से 70 आवास ही बिक सके। UP News
सरकार और विकास प्राधिकरण पहले भी इन संपत्तियों की बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर चुके हैं। संपत्तियों को बेचने के लिए एजेंसी के माध्यम से टेंडर भी निकाला गया था, लेकिन किसी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद मूल कीमत में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक कमी करके बिक्री का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके बावजूद बिक्री में अपेक्षित तेजी नहीं आई और कुछ ही आवास बिक सके। अब सरकार ने रणनीति बदलते हुए केवल कीमत घटाने के बजाय संपत्तियों को बेहतर स्वरूप देकर दोबारा बाजार में उतारने का रास्ता चुना है। UP News
नई योजना के तहत जरूरत के मुताबिक संपत्तियों के रखरखाव और सुंदरीकरण पर होने वाले खर्च के लिए प्रदेश सरकार बजट उपलब्ध कराएगी। इसके बाद संबंधित विकास प्राधिकरण मौजूदा दरों पर इन संपत्तियों की बिक्री करेगा। इसका सीधा मकसद यह है कि संभावित खरीदार को संपत्ति पुरानी, उपेक्षित या अधूरी न दिखाई दे और उसे वहां उपलब्ध सुविधाओं का स्पष्ट अंदाजा मिल सके। UP News
उत्तर प्रदेश में लंबे समय से विकास प्राधिकरणों की ऐसी संपत्तियां चर्चा में रही हैं, जिनकी बिक्री नहीं हो पाने के कारण प्राधिकरणों की बड़ी पूंजी फंसी रहती है। ऐसे में 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को दोबारा बाजार में उतारने की योजना केवल मुरादाबाद तक सीमित नहीं है। प्रदेश के अन्य विकास प्राधिकरणों में भी ऐसी संपत्तियों की पहचान और उन्हें आकर्षक बनाकर बेचने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। खास तौर पर बड़े शहरी क्षेत्रों में प्राधिकरणों की खाली पड़ी व्यावसायिक और आवासीय संपत्तियों को लेकर खरीदारों की रुचि बढ़ाने की कोशिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है। UP News
यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो संभावित खरीदारों को सरकारी विकास प्राधिकरणों की ऐसी संपत्तियां नए और बेहतर स्वरूप में उपलब्ध हो सकती हैं, जो लंबे समय से बिक्री का इंतजार कर रही हैं। सरकार के लिए यह योजना फंसी हुई पूंजी को निकालने और विकास प्राधिकरणों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने का माध्यम बन सकती है, जबकि खरीदारों के लिए बेहतर सुविधाओं से तैयार प्लाट, फ्लैट और व्यावसायिक संपत्तियों का विकल्प सामने आएगा। UP News
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