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उत्तर प्रदेश के हजारों युवा होमगार्ड भर्ती का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और अब जब उत्तर प्रदेश में 41 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है तो युवाओं की दिलचस्पी और अधिक बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश में इन दिनों होमगार्ड भर्ती को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। उत्तर प्रदेश के हजारों युवा होमगार्ड भर्ती का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे और अब जब उत्तर प्रदेश में 41 हजार से ज्यादा पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है तो युवाओं की दिलचस्पी और अधिक बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी होमगार्ड की नौकरी को स्थिर भविष्य और सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश में गांव से लेकर शहर तक के युवा होमगार्ड भर्ती में हिस्सा ले रहे हैं। उत्तर प्रदेश के युवाओं के मन में इस नौकरी की जिम्मेदारी, वेतन और चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल हैं। अगर आप भी उत्तर प्रदेश में होमगार्ड बनने का सपना देख रहे हैं तो यह जानकारी आपके बहुत काम आने वाली है।
होमगार्ड का काम सिर्फ ड्यूटी करना नहीं होता बल्कि जरूरत पड़ने पर पुलिस और प्रशासन की मदद करना भी होता है। जब किसी इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होती है या किसी बड़े आयोजन में भीड़ संभालनी होती है तब होमगार्ड अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा आग लगने, बाढ़ आने, महामारी फैलने या किसी दूसरी आपात स्थिति में भी होमगार्ड को मैदान में उतरना पड़ता है। कई बार त्योहारों, चुनावों और बड़े धार्मिक आयोजनों में भी इन्हें तैनात किया जाता है। आसान शब्दों में समझें तो जहां प्रशासन को अतिरिक्त मदद की जरूरत होती है वहां होमगार्ड जिम्मेदारी संभालते हैं।
उत्तर प्रदेश में होमगार्ड बनने के लिए उम्मीदवार का कम से कम दसवीं पास होना जरूरी है। इसके साथ ही अभ्यर्थी की उम्र 18 साल से कम और 30 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उम्र सीमा में नियम के अनुसार छूट भी दी जाती है। भर्ती में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं देखी जाती बल्कि उम्मीदवार का व्यवहार और चरित्र भी अच्छा होना जरूरी माना जाता है क्योंकि इस पद पर अनुशासन और जिम्मेदारी सबसे ज्यादा मायने रखती है।
बहुत से लोग सोचते हैं कि होमगार्ड को नियमित सरकारी कर्मचारी की तरह हर महीने तय वेतन मिलता होगा लेकिन ऐसा नहीं है। होमगार्ड स्वयंसेवक के रूप में काम करते हैं और उन्हें ड्यूटी के हिसाब से भुगतान किया जाता है। अगर किसी होमगार्ड को रोज ड्यूटी मिलती है तो उसे प्रतिदिन करीब 600 रुपये दिए जाते हैं। ऐसे में अगर किसी को महीने के पूरे 30 दिन ड्यूटी पर बुलाया जाए तो उसकी कमाई लगभग 18 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा समय-समय पर सरकार की ओर से महंगाई भत्ता भी दिया जाता है।
होमगार्ड भर्ती में सबसे पहले लिखित परीक्षा आयोजित की जाती है। इसमें सामान्य ज्ञान से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। परीक्षा में कुल 100 प्रश्न होते हैं और हर सवाल एक अंक का होता है। पूरी परीक्षा के लिए दो घंटे का समय दिया जाता है। अगर कोई उम्मीदवार बहुत कम अंक लाता है तो वह आगे की प्रक्रिया से बाहर हो जाता है। लिखित परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को शारीरिक जांच और दौड़ के लिए बुलाया जाता है।
होमगार्ड भर्ती में सिर्फ पढ़ाई काफी नहीं होती शारीरिक फिटनेस भी बेहद जरूरी होती है। पुरुष उम्मीदवारों की लंबाई सामान्य तौर पर 168 सेंटीमीटर मांगी जाती है। वहीं कुछ वर्गों को इसमें छूट भी मिलती है। महिला उम्मीदवारों के लिए भी न्यूनतम लंबाई तय की गई है। इसके साथ ही महिलाओं का वजन भी तय मानक के अनुसार होना चाहिए। पुरुष उम्मीदवारों के सीने की माप भी भर्ती प्रक्रिया में जांची जाती है।
लिखित परीक्षा और दस्तावेज जांच के बाद उम्मीदवारों को दौड़ पूरी करनी होती है। पुरुष उम्मीदवारों को लगभग 4.8 किलोमीटर की दौड़ तय समय में पूरी करनी होती है। वहीं महिला उम्मीदवारों के लिए दूरी थोड़ी कम रखी जाती है। जो उम्मीदवार दौड़ पूरी कर लेते हैं उन्हें मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है। मेडिकल में फिट पाए जाने के बाद ही अंतिम रूप से होमगार्ड के तौर पर चयन किया जाता है।
उत्तर प्रदेश में होमगार्ड की नौकरी को लेकर युवाओं का उत्साह इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि इसमें सरकारी व्यवस्था के साथ काम करने का मौका मिलता है। गांव और छोटे शहरों के युवाओं के लिए यह नौकरी सम्मान और रोजगार दोनों का जरिया बनती जा रही है। हालांकि यह स्थायी नौकरी नहीं मानी जाती लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में युवा इसे अपने करियर की शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। यही वजह है कि हर भर्ती में लाखों उम्मीदवार आवेदन करते हैं और कड़ी मेहनत के साथ तैयारी करते हैं।
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