गाजियाबाद जिला न्यायालय में चैंबर की कमी से जूझ रहे हजारों अधिवक्ताओं की समस्या अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंच गई है। बार एसोसिएशन गाजियाबाद ने आरईएस के निष्प्रयोज्य गेस्ट हाउस की जमीन आवंटित कर वहां बहुमंजिला चैंबर कॉम्प्लेक्स और पार्किंग विकसित करने की मांग की है।

UP News : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिला न्यायालय में वकालत करने वाले हजारों अधिवक्ताओं के सामने चैंबर की कमी का मुद्दा एक बार फिर प्रमुखता से उठाया गया है। कचहरी में बड़ी संख्या में ऐसे अधिवक्ता हैं जिनके पास अपना चैंबर नहीं है। उन्हें अपने नियमित न्यायिक एवं व्यावसायिक कार्यों को संचालित करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए बार एसोसिएशन गाजियाबाद ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष पहल करने की मांग की है। बार एसोसिएशन गाजियाबाद के अध्यक्ष ब्रह्मदेव त्यागी ने अपने अधिवक्ता साथियों के साथ मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को संबोधित एक प्रार्थना पत्र एवं ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा है। इसमें जिला न्यायालय परिसर में बार सभागार के ठीक बगल में स्थित ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) के निष्प्रयोज्य गेस्ट हाउस की भूमि बार एसोसिएशन को आवंटित करने की मांग की गई है। अधिवक्ताओं का प्रस्ताव है कि इस जमीन पर बहुमंजिला चैंबर कॉम्प्लेक्स बनाया जाए। इसके साथ ही पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी विकसित की जाए, ताकि चैंबरविहीन अधिवक्ताओं को कामकाज के लिए उचित स्थान मिल सके। इस मांग को केवल कुछ अधिवक्ताओं के लिए कमरे उपलब्ध कराने का विषय नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे जिला न्यायालय की बुनियादी सुविधाओं और न्यायिक कार्यव्यवस्था से जुड़ी जरूरत के रूप में भी देखा जा रहा है। UP News
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बार एसोसिएशन की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जिला न्यायालय गाजियाबाद में अधिवक्ताओं की संख्या काफी अधिक है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वकीलों की है, जिन्हें अभी तक अपना चैंबर उपलब्ध नहीं हो पाया है। बार सभागार से लगी आरईएस की जमीन पर स्थित सरकारी गेस्ट हाउस लंबे समय से उपयोग में नहीं होने के कारण निष्प्रयोज्य पड़ा है। ऐसे में अधिवक्ताओं का मानना है कि इस भूमि का उपयोग न्यायालय परिसर की आवश्यकता के अनुरूप किया जा सकता है। बार एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देकर इस भूमि का आवंटन बार एसोसिएशन गाजियाबाद के पक्ष में कराया जाए। इससे वहां व्यवस्थित तरीके से बहुमंजिला चैंबरों का निर्माण संभव हो सकेगा। UP News
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गाजियाबाद की जिला कचहरी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण न्यायिक केंद्रों में शामिल है। यहां विभिन्न प्रकार के मुकदमों की पैरवी करने के लिए बड़ी संख्या में अधिवक्ता नियमित रूप से पहुंचते हैं। बार एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार एसोसिएशन के सदस्य अधिवक्ताओं की संख्या 3,572 दर्ज है। इतनी बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं के बीच चैंबरों की उपलब्धता का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। विशेष रूप से नए अधिवक्ताओं और उन वकीलों के लिए यह समस्या अधिक कठिन हो जाती है, जिनके पास अपना स्वतंत्र चैंबर नहीं है। उन्हें अपने मुवक्किलों से बातचीत करने, मुकदमों से संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन करने, फाइलें व्यवस्थित रखने और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के लिए उपयुक्त स्थान की जरूरत होती है।
चैंबर की अनुपलब्धता के कारण उन्हें कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। UP News
गाजियाबाद के अधिवक्ताओं की चैंबर संबंधी समस्या को लेकर इससे पहले भी शासन स्तर पर पहल की खबर सामने आ चुकी है। हिन्दुस्तान की 2 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रह्मदेव त्यागी ने प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं साहिबाबाद के विधायक सुनील शर्मा को पत्र लिखकर आरईएस के गेस्ट हाउस की भूमि अधिवक्ताओं के चैंबर निर्माण के लिए आवंटित कराने का अनुरोध किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, कैबिनेट मंत्री ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मांग से अवगत कराया था। अब 31 अक्टूबर को जिलाधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की पहल इस मांग को आगे बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। इससे स्पष्ट है कि बार एसोसिएशन इस मुद्दे पर शासन और प्रशासन का ध्यान लगातार आकर्षित करने का प्रयास कर रही है। UP News
गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ब्रह्मदेव त्यागी ने अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान भी नए अधिवक्ताओं के लिए चैंबर बनवाने का प्रयास अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया था। जागरण की चुनाव संबंधी रिपोर्ट में उनके इस संकल्प का उल्लेख किया गया था। इससे पता चलता है कि चैंबरविहीन अधिवक्ताओं को सुविधा उपलब्ध कराने का विषय बार एसोसिएशन के नेतृत्व के सामने पहले से ही एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। UP News
गाजियाबाद कचहरी में अधिवक्ताओं के लिए चैंबरों की उपलब्धता का प्रश्न नया नहीं है। पूर्व में भी इस दिशा में निर्माण और आवंटन की प्रक्रिया को लेकर गतिविधियां सामने आती रही हैं। नवभारत टाइम्स की 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कचहरी परिसर में सीबीआई कोर्ट के पास 24 चैंबरों का निर्माण कराया गया था। इन चैंबरों के आवंटन को लेकर अधिवक्ताओं के बीच सवाल और विवाद भी सामने आए थे। बाद में 2019 में इन नवनिर्मित चैंबरों के आवंटन की प्रक्रिया तेज किए जाने की खबर प्रकाशित हुई थी। इन पुराने घटनाक्रमों से यह स्पष्ट होता है कि चैंबरों की उपलब्धता और उनके उचित आवंटन का सवाल गाजियाबाद कचहरी में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। हालांकि, वर्तमान में कितने अधिवक्ता चैंबरविहीन हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। UP News
बार एसोसिएशन की मांग के पीछे एक व्यावहारिक योजना भी है। यदि आरईएस के निष्प्रयोज्य गेस्ट हाउस की भूमि उपलब्ध हो जाती है तो वहां बहुमंजिला इमारत बनाकर सीमित भूमि का बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
इस प्रस्ताव से कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं:
हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक स्वरूप भूमि आवंटन, विभागीय सहमति, स्वीकृत नक्शे और निर्माण योजना पर निर्भर करेगा। UP News
मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट विष्णु कुमार गुप्ता ने बताया कि गाजियाबाद कचहरी में कई हजार अधिवक्ता हैं। इनमें बहुत से अधिवक्ताओं के पास अपने चैंबर नहीं हैं। इसके कारण उन्हें वकालत के नियमित कार्यों को करने में परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि बार सभागार के पास स्थित ग्रामीण अभियंत्रण सेवा का गेस्ट हाउस अब उपयोग में नहीं है। ऐसे में इस भूमि को अधिवक्ताओं के हित में इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि यदि इस भूमि पर बहुमंजिला चैंबर और पार्किंग की व्यवस्था विकसित हो जाती है तो इससे बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं को लाभ मिल सकता है। UP News
बार एसोसिएशन गाजियाबाद की इस पहल के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभाग इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेते हैं। चूंकि प्रस्तावित भूमि ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधीन बताई गई है, इसलिए इसके हस्तांतरण या आवंटन के लिए संबंधित विभाग की सहमति, भूमि की स्थिति और सरकारी नियमों के अनुसार निर्णय आवश्यक होगा। अधिवक्ताओं की मांग है कि इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाए और चैंबर निर्माण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कार्रवाई की जाए। फिलहाल 31 अक्टूबर को जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अधिवक्ताओं को उम्मीद है कि उनकी वर्षों पुरानी समस्या के समाधान का रास्ता निकलेगा। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो गाजियाबाद जिला न्यायालय में चैंबरविहीन अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है। UP News
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