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प्रदेश सरकार की पहल पर आयोजित तीन दिवसीय 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026' के दूसरे दिन शनिवार को राजधानी लखनऊ के जन भवन में 'मैंगो बायर-सेलर मीट' का आयोजन किया गया।

Up News : उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर आयोजित तीन दिवसीय 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव-2026' के दूसरे दिन शनिवार को राजधानी लखनऊ के जन भवन में 'मैंगो बायर-सेलर मीट' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश के आम उत्पादकों, बागवानों और निर्यातकों को एक ही मंच पर लाकर उत्तर प्रदेश के विश्वप्रसिद्ध आमों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम उठाना रहा। इस दौरान आम उत्पादकों और निर्यातकों के बीच कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए। यह आयोजन किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य उपलब्ध कराने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।
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कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, कृषि विशेषज्ञ, निर्यातक और प्रगतिशील किसान मौजूद रहे। राज्यपाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को सीधे बड़े खरीदारों और वैश्विक बाजार से जोड़ना है।
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उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह पहला अवसर है जब जन भवन परिसर में आम महोत्सव आयोजित किया गया है। उन्होंने राज्यपाल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें जन भवन के आंगन में अपने उत्पाद प्रदर्शित करने और व्यापारिक अवसर प्राप्त करने का मौका मिलेगा। उनके अनुसार यह कदम किसानों का मनोबल बढ़ाने वाला है और लंबे समय तक याद रखा जाएगा।
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मंत्री ने बताया कि भारत के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत है। उन्होंने उद्योग जगत से प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार इस क्षेत्र में 50 प्रतिशत तक सब्सिडी उपलब्ध करा रही है। उनका कहना था कि यदि आम की बेहतर ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा मिले तो किसानों की आय में कई गुना वृद्धि संभव है।
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दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) शुरू होने के बाद प्रदेश के कृषि उत्पादों, विशेषकर आम के निर्यात को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक कार्गो सुविधा उपलब्ध होने से प्रदेश का आम सीधे रूस सहित कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेगा, जिससे किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। मंत्री ने बताया कि प्रदेश की कुल कृषि भूमि में उद्यान फसलों का क्षेत्रफल लगभग 9 प्रतिशत है, लेकिन उत्पादन में इनकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत और कुल कृषि मूल्य में 52 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि उद्यान विभाग आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों को उच्च मूल्य वाली फसलों, जैसे शिमला मिर्च और स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है।
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तकनीकी सत्र में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, एपीडा, एफपीओ प्रतिनिधियों, प्रगतिशील किसानों और खाद्य प्रसंस्करण विशेषज्ञों ने किसानों को सुरक्षित तुड़ाई, पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग, प्राकृतिक खेती, निर्यात मानकों और कृषि स्टार्टअप की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों ने किसानों को वैश्विक बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता सुधार और आधुनिक तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया।
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