UP Marriage Registration: मैरिज सर्टिफिकेट भविष्य में बैंक, पासपोर्ट, वीजा, प्रॉपर्टी और सरकारी योजनाओं समेत कई जरूरी कामों में काम आता है। अगर आपने अभी तक शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो समय रहते इसे पूरा कर लेना बेहतर रहेगा।

उत्तर प्रदेश में शादी के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन कराना सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि कानूनी सुरक्षा भी है। यह सभी धर्म और जाति के लोगों पर लागू होता है। मैरिज सर्टिफिकेट भविष्य में बैंक, पासपोर्ट, वीजा, प्रॉपर्टी और सरकारी योजनाओं समेत कई जरूरी कामों में काम आता है। अगर आपने अभी तक शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो समय रहते इसे पूरा कर लेना बेहतर रहेगा।
उत्तर प्रदेश में शादी का रजिस्ट्रेशन उसी जिले या तहसील में कराया जा सकता है जहां दूल्हा, दुल्हन या उनके माता-पिता का स्थायी पता हो। दूल्हे की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष और दुल्हन की 18 वर्ष होना जरूरी है। अगर दोनों अलग-अलग राज्यों के हैं तो यूपी में आवेदन के लिए संबंधित निवास प्रमाण की जरूरत होगी।
मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए सबसे पहले IGRS UP पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के साथ पहचान पत्र, पता प्रमाण, शादी से जुड़े दस्तावेज और गवाहों की जानकारी अपलोड करनी होती है। दस्तावेजों की जांच के बाद सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से अपॉइंटमेंट मिलता है। तय तारीख पर दूल्हा-दुल्हन और दोनों गवाहों को बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए उपस्थित होना पड़ता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ दिनों में मैरिज सर्टिफिकेट ऑनलाइन डाउनलोड किया जा सकता है।
अगर शादी परिवार की मौजूदगी के बिना हुई है तो शादी कराने वाले पंडित या काजी का शपथपत्र और गवाही देनी पड़ सकती है। वहीं कोर्ट मैरिज या आर्य समाज मंदिर में हुई शादी के मामलों में शपथपत्र सहित जरूरी दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होता है। अब आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन भी प्रक्रिया का हिस्सा है।
अगर सर्टिफिकेट में नाम, जन्मतिथि या अन्य जानकारी गलत दर्ज हो जाए तो उसे ऑनलाइन ठीक नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में आवेदन देकर सुधार की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। मैरिज सर्टिफिकेट केवल एक दस्तावेज नहीं बल्कि भविष्य में आने वाली कई कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों से बचाने वाला प्रमाण है। इसलिए शादी के बाद जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन कराना समझदारी भरा कदम है।
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