उत्तर प्रदेश में MLC चुनाव के बीच भाजपा ने छह सीटों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इसी दौरान पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने और किसी राजनीतिक दल से जुड़ने के बजाय स्वतंत्र रूप से जनता के मुद्दे उठाने का ऐलान किया है। 2027 से पहले दोनों घटनाक्रम क्यों चर्चा में हैं?

UP News : उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले विधान परिषद चुनाव ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के चुनाव के लिए अपने छह प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं, तो दूसरी तरफ पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के राजनीति में आने के ऐलान ने प्रदेश की सियासत में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में साफ किया है कि वह राजनीति में कदम रखेंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगी। उन्होंने उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताते हुए आम लोगों के मुद्दों और उनकी आवाज को राजनीति के केंद्र में रखने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। भाजपा ने इनमें छह सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। भाजपा की घोषित सूची के अनुसार—
इन नामों के ऐलान के साथ ही उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट होने लगी है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की घोषित सूची में छह नामों में ब्राह्मण और अन्य सवर्ण पृष्ठभूमि से जुड़े चेहरों की मौजूदगी को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि केवल उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भाजपा की पूरी चुनावी रणनीति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में विशिष्ट मतदाता समूह मतदान करता है और उम्मीदवारों का चयन भी स्थानीय संगठन, सामाजिक समीकरण तथा संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में उनकी स्वीकार्यता जैसे अनेक कारकों से प्रभावित हो सकता है। भाजपा की ताजा सूची को लेकर राजनीतिक विश्लेषण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का दौर चल रहा है। इससे पहले भाजपा की संगठनात्मक तैयारियों में भी सामाजिक प्रतिनिधित्व और जातीय समीकरणों को लेकर चर्चा होती रही है।
विधान परिषद चुनाव की राजनीतिक हलचल के बीच पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर तस्वीर साफ कर दी है। उन्होंने कहा है कि वह राजनीति में आएंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं जाएंगी। उनके मुताबिक उनकी राजनीति आम लोगों के मुद्दों और उनकी आवाज को सामने लाने पर केंद्रित होगी। दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में राजनीति में पैसा, बाहुबल और जातीय समीकरण जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह जाति और धर्म के समीकरण के आधार पर राजनीति करने में विश्वास नहीं रखतीं। दिव्या मित्तल के ऐलान के बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया। उनके इस कदम को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग अथवा व्यक्तिगत आरोपों के जरिए महिलाओं को सार्वजनिक जीवन से दूर करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने की बात कही है।
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में भाजपा वर्तमान में सबसे बड़ा दल है। विधान परिषद की आधिकारिक पार्टी-स्थिति के अनुसार भाजपा के 79 सदस्य हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के 10 सदस्य हैं। वर्तमान चुनाव में 11 सीटों पर मतदान होना है। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर से नामांकन शुरू हो चुका है, 6 अक्टूबर नामांकन की अंतिम तारीख है, 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापसी हो सकेगी। 23 अक्टूबर को मतदान तथा 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।
विधान परिषद चुनाव को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर भाजपा ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, वहीं दूसरी ओर दिव्या मित्तल जैसे प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले नए राजनीतिक चेहरे का स्वतंत्र राजनीति में आने का ऐलान प्रदेश की राजनीति में एक अलग तरह की चर्चा पैदा कर रहा है। अब देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधान परिषद चुनाव में भाजपा की घोषित रणनीति किस तरह आगे बढ़ती है और दिव्या मित्तल अपने घोषित स्वतंत्र राजनीतिक मंच को किस रूप में आकार देती हैं। फिलहाल दोनों घटनाक्रमों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।UP News :
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