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भाजपा, समाजवादी पार्टी (सपा), बसपा और कांग्रेस सभी दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। इसी बीच भाजपा और सपा ने विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को 2027 से पहले एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखना शुरू कर दिया है।

UP News : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। भाजपा, समाजवादी पार्टी (सपा), बसपा और कांग्रेस सभी दल अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं। इसी बीच भाजपा और सपा ने विधान परिषद (MLC) की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को 2027 से पहले एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखना शुरू कर दिया है। UP News
विधान परिषद की इन 11 सीटों में से भाजपा ने पांच प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए हैं, जबकि शेष सीटों पर मंथन जारी है। वहीं सपा भी कई सीटों पर उम्मीदवार उतार चुकी है और चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी है। उम्मीदवारों के चयन को लेकर दोनों दलों में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है, जिससे दावेदारों की बेचैनी बढ़ती नजर आ रही है। इन 11 सीटों में 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं, जिनका कार्यकाल 7 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल प्रतिनिधित्व का नहीं, बल्कि बौद्धिक वर्ग के समर्थन का संकेत भी माना जाता है। यही वजह है कि इसे 2027 से पहले एक “सियासी सेमीफाइनल” के रूप में देखा जा रहा है। पिछले चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि सपा को 3 सीटें मिली थीं। एक सीट शिक्षक दल और एक निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई थी। मौजूदा समीकरणों में दोनों प्रमुख दल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। UP News
भाजपा ने जहां अपनी जीत वाली पांच सीटों पर प्रत्याशी तय कर दिए हैं, वहीं हार वाली सीटों पर नए चेहरे तलाशे जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगरा शिक्षक सीट से निर्दलीय जीते आकाश अग्रवाल सहित कई नेता भाजपा के संपर्क में हैं। हाल ही में उनके पार्टी मुख्यालय पहुंचने की खबरों ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। इसी तरह शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, जिन्हें संभावित समीकरणों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। UP News
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