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UP News: यह मामला अमरोहा का बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आए आवेदनों की जांच के दौरान अधिकारियों को बड़ी गड़बड़ी मिली। जांच में पता चला कि करीब 1500 ऐसे आवेदन थे जिनमें बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी।

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में मदद के लिए चलाई जा रही इस योजना का लाभ लेने के लिए कई ऐसे आवेदन किए गए जिनमें पहले से शादी हो चुकी थी। जांच शुरू हुई तो अधिकारियों के सामने हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई। मंडप सजने से पहले ही पूरे मामले का खुलासा हो गया और हजारों आवेदन निरस्त कर दिए गए।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला अमरोहा का बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आए आवेदनों की जांच के दौरान अधिकारियों को बड़ी गड़बड़ी मिली। जांच में पता चला कि करीब 1500 ऐसे आवेदन थे जिनमें बेटियों की शादी पहले ही हो चुकी थी। इसके बावजूद योजना का लाभ लेने के लिए दोबारा आवेदन कर दिया गया था। सच्चाई सामने आने के बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए कुल 2200 आवेदन निरस्त कर दिए हैं। अब बाकी आवेदनों की अलग-अलग स्तर पर जांच की जा रही है।
जांच में सामने आया कि कई आवेदकों की शादी पहले ही हो चुकी थी लेकिन योजना के तहत मिलने वाले लाभ के लिए आवेदन किया गया। वहीं कुछ मामले ऐसे भी मिले जिनमें शादी से पहले आवेदन किया गया था लेकिन सामूहिक विवाह कार्यक्रम की तारीख तय नहीं होने के कारण परिवारों ने अपनी तय तारीख पर शादी कर दी। इसके बाद जब विभाग की ओर से जांच की गई तो पूरी स्थिति साफ हो गई और ऐसे आवेदनों को रद्द कर दिया गया।
सामूहिक विवाह योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवेदनों की जांच कई चरणों में की जा रही है। पहली जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद अब दूसरी जांच ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा की जा रही है। इसके बाद तीसरे चरण में जनपद स्तर के अधिकारी जांच करेंगे। जांच पूरी होने के बाद ही पात्र लोगों को योजना का लाभ दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों की शादी में मदद के लिए चलाई जाती है। इस योजना के तहत सरकार की ओर से कुल एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसमें 60 हजार रुपये सीधे वधू के बैंक खाते में भेजे जाते हैं। 25 हजार रुपये का गृहस्थी का सामान उपहार के रूप में दिया जाता है जबकि 15 हजार रुपये शादी के आयोजन जैसे-टेंट, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च किए जाते हैं।
जिले को इस साल 800 सामूहिक विवाह कराने का लक्ष्य मिला था। इसके लिए समाज कल्याण विभाग की ओर से 31 मई तक आवेदन मांगे गए थे। विभाग को करीब तीन हजार आवेदन प्राप्त हुए थे। जांच के लिए इन्हें ब्लॉक और निकाय स्तर पर भेजा गया जहां पहली जांच में ही कई आवेदन गलत पाए गए।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का लाभ लेने के लिए सरकार ने कुछ जरूरी शर्तें तय की हैं। इसके तहत लड़की की उम्र कम से कम 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होनी चाहिए। दोनों का पहला विवाह होना जरूरी है। इसके अलावा लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है।
योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को पारदर्शी तरीके से दिया जाता है। विवाह पूरा होने के बाद लाभार्थियों की सूची जिलाधिकारी द्वारा स्वीकृत की जाती है। इसके बाद सूची विभागीय पोर्टल पर अपलोड होती है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद वधू के बैंक खाते में 60 हजार रुपये भेज दिए जाते हैं।
जिला समाज कल्याण अधिकारी पंखुरी जैन ने बताया कि, आवेदनों की दूसरी जांच चल रही है। 2200 आवेदन पत्र निरस्त किए गए हैं। जांच में सामने आया कि इन आवेदनों में शामिल लोगों की शादियां पहले ही हो चुकी थीं जिसके बाद निरस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
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