उत्तर प्रदेश का अनोखा शिव मंदिर, जिसकी रखवाली करता है मेंढक
भारत
चेतना मंच
09 Sep 2024 10:48 PM
UP News : हमारे देश में कई ऐसे मंदिर है जो अपनी आस्था और इतिहास के लिए जाने जाते है, जहां भगवान के भक्तों का चमत्कार देखने को मिलता है। इस बीच हम आपको उत्तर प्रदेश के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जिसकी रखवाली मेंढक करता है। उत्तर प्रदेश का यह अनोखा मंदिर पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। उत्तर प्रदेश के इस मंदिर को मेढ़क मंदिर भी कहा जाता है, यहां भक्त शिव की अराधना करने आते है। उत्तर प्रदेश के इस मंदिर की खासियत यह है कि आपको यहां शिव मंदिर होते हुए भी नंदी नहीं बल्कि मेढ़क दिखेगा। आइए जानते है उत्तर प्रदेश के इस मंदिर के बारे में..
भगवान शिव का बेहद चमत्कारी मंदिर UP News
आपको बता दें कि हम उत्तर प्रदेश के जिस मंदिर के बारे में बात कर रहे है वह कोई और नहीं बल्कि लखीमपुर खीरी जिले के ओयल कस्बे में स्थित भगवान शिव का मंदिर है। जो काफी प्राचीन इस मंदिर का निर्माण मंडूक यंत्र के आधार पर किया गया था। मेढ़क द्वारा रखवाली करने के कारण इसका नाम मेंढक मंदिर पड़ गया। ऐसा कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के इस मंदिर की रखवाली की जिम्मेदारी 11 वीं शताब्दी से चाहमान शासकों के पास हुआ करती थी। चाहमान वंश के राजा बख्श सिंह ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर को तंत्र विद्या के आधार पर बनवाया गया था।
वहीं पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के इस शिव मंदिर में भगवान शिव एक बरसाती मेंढक की पीठ पर विराजमान है। कहा जाता है इस दौरान मेंढक उनकी रखवाली कर रहा है। भारत में यह एकलौता मंदिर है, जिसमें भगवान शिव की रखवाली एक मेंढक करता है। उत्तर प्रदेश के इस मंदिर के बारे में ममान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की से प्रर्थना करता है उसकी कामना पूरी हो जाती है। इस मंदिर को लेकर कई सारे चमत्कारी किस्से भी मशहूर हैं। दीपावली के दिन इस मंदिर की विशेष पूजा-अर्चना होती है।
शिवलिंग बदलता है कई बार रंग
इसके अलावा उत्तर प्रदेश के इस खास मंदिर की एक और चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें स्थापित शिवलिंग दिनभर में कई बार रंग बदलता है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को नर्मदेश्वर महादेव के नाम से मशहूर है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के इस मंदिर को बनाने में संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। इस मंदिर में नंदी भगवान की मूर्ति खड़ी अवस्था में स्थापित है। तंत्रशास्त्र के हिसाब से निर्माण किए गए मंदिर का छत्र इसी पर आधारित है। सूर्य की रोशनी के साथ पहले यह छत्र घूमता था। उसी के कारण इस मंदिर के शिवलिंग का रंग बदलता है। हालांकि, अब यह छत्र सही रख-रखाव न होने की वजह से खराब हो गया है। UP News
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