यूपी में चकबंदी के नियमों में बड़ा बदलाव : अब 75% किसानों की सहमति से ही शुरू होगी प्रक्रिया
भारत
चेतना मंच
28 Aug 2025 06:36 PM
UP News : यूपी सरकार ने किसानों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए चकबंदी प्रक्रिया के नियमों में अहम संशोधन किया है। यूपी में अब किसी भी गांव में चकबंदी तभी लागू होगी, जब वहां के 75 फीसदी खाताधारक (किसान) लिखित रूप से अपनी सहमति देंगे। यूपी में पहले चकबंदी शुरू करने के लिए ग्राम पंचायत का प्रस्ताव और ग्राम प्रधान व सदस्यों का बहुमत काफी माना जाता था। यूपी में कई बार इससे विवाद खड़े हो जाते थे और गांवों में विरोध या फिर कोर्ट केस तक की स्थिति पैदा हो जाती थी। अब यूपी सरकार ने यह साफ कर दिया है कि किसानों की भागीदारी और सहमति अनिवार्य होगी।
किसानों की राय सबसे अहम
चकबंदी विभाग के मुताबिक, किसानों की जमीन को बिखरे हुए टुकड़ों से निकालकर एक जगह पर समेकित करने से कृषि कार्य आसान और अधिक उत्पादक हो जाता है। लेकिन अक्सर किसान असहमति जताते थे। इसलिए अब जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि चकबंदी की प्रक्रिया शुरू करने से पहले 75% खाताधारकों की लिखित सहमति अनिवार्य रूप से ली जाए। इसके लिए एक मानक प्रारूप भी जिलों को भेजा गया है।
आंकड़ों में चकबंदी
* प्रदेश में कुल राजस्व ग्राम 1,07,529
* ऐसे गांव जहां अब तक चकबंदी नहीं हुई 6,974
* इनमें से चकबंदी के लिए उपयुक्त गांव 1,767
राजस्व ग्राम जिनमें पहले चक्र की चकबंदी हो चुकी है 1,00,555
क्यों जरूरी है चकबंदी?
चकबंदी का मतलब है बिखरी हुई जमीन की मिलकियत को समेकित करना। इसका फायदा यह होता है कि किसान को खेती के लिए एक ही जगह पर बड़ा टुकड़ा मिलता है, जिससे कृषि में समय, श्रम और लागत कम होती है। इससे न सिर्फ खेतों के बीच की सीमाओं पर विवाद घटते हैं, बल्कि सिंचाई और अन्य कृषि संसाधनों का प्रबंधन भी आसान हो जाता है। कुल मिलाकर, योगी सरकार का यह फैसला किसानों की सहमति और सहभागिता पर आधारित होकर न सिर्फ विवादों को कम करेगा, बल्कि कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा देगा। UP News