
UP News : उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले की मदीना मस्जिद पर बुलडोजर चलाने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण रोक लगाई है। कोर्ट के इस फैसले से मस्जिद के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों पर एक बड़ा मोड़ आया है।कोर्ट ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है और आगामी सुनवाई की तारीख 23 मई निर्धारित की है। यह मामला कई महीनों से न्यायालय में विचाराधीन था। आइए, जानते हैं इस पूरे विवाद के बारे में विस्तार से।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फतेहपुर जिले के मदीना मस्जिद के ध्वस्तीकरण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने 23 मई तक इस मस्जिद को गिराने के आदेश पर निषेधाज्ञा जारी की है। कोर्ट की अगली सुनवाई के बाद ही मस्जिद के भविष्य पर निर्णय लिया जाएगा।
मदीना मस्जिद फतेहपुर जिले के मलवां थाना क्षेत्र में स्थित है। यह मस्जिद 1976 में सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा आवंटित तीन बिस्वा जमीन पर बनाई गई थी। कई सालों से यह मस्जिद नियमित रूप से नमाज के लिए उपयोग की जा रही है, लेकिन इसके निर्माण को लेकर कानूनी विवाद जारी है।
वक्फ सुन्नी मदीना मस्जिद समिति के अध्यक्ष हैदर अली ने जिला राजस्व अधिकारियों द्वारा मस्जिद को गिराने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में याचिका दायर की, जिस पर अब कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। इस याचिका में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी।
हाई कोर्ट के जज मनीष कुमार निगम ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वे दो हफ्ते के भीतर याचिका पर अपना जवाब दाखिल करें। इस आदेश के तहत मस्जिद के गिराए जाने की प्रक्रिया को रोका गया है।
याचिकाकर्ता हैदर अली का कहना है कि मस्जिद के गिराने का आदेश 22 अगस्त, 2024 को केवल इस आधार पर दिया गया कि यह ग्राम सभा की जमीन पर अवैध रूप से बनी है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उन्हें अपने मामले के समर्थन में साक्ष्य पेश करने का कोई मौका नहीं दिया गया।
फतेहपुर जिले की मदीना मस्जिद का ऐतिहासिक महत्व है और यह वर्षों से इलाके में धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रही है। इसे एक धार्मिक स्थल के रूप में देखा जाता है, जहाँ नियमित रूप से नमाज अदा की जाती रही है।
अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 मई को होगी, जिसके बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट इस विवाद पर अपना अंतिम फैसला सुनाएगा। मस्जिद के भविष्य के बारे में निर्णय इस सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस मस्जिद को लेकर पहले से ही कानूनी और प्रशासनिक विवाद चल रहे हैं। कुछ सालों से इस मस्जिद को लेकर स्थानीय अधिकारियों और धार्मिक समुदाय के बीच विवाद बढ़ गया है। कोर्ट का यह आदेश इस विवाद में एक नया मोड़ है, जो मस्जिद की सुरक्षा और संरक्षण के पक्ष में अहम साबित हो सकता है। UP News :