उत्तर प्रदेश में जाति आधारित प्रदर्शन बैन, अखिलेश यादव ने उठाए सवाल
भारत
चेतना मंच
22 Sep 2025 05:15 PM
उत्तर प्रदेश सरकार ने जाति आधारित राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक जातिगत प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तीखा विरोध जताया है और सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि हजारों सालों से चले आ रहे जातिगत भेदभाव को कैसे दूर किया जाएगा। UP News :
अखिलेश यादव का पलटवार
अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट शेयर करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 5000 सालों से मन में बसे जातिगत भेदभाव को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे? वस्त्र, वेशभूषा और प्रतीक चिन्हों के माध्यम से जाति-प्रदर्शन से उपजे भेदभाव को कैसे मिटाया जाएगा? किसी के मिलने पर नाम से पहले जाति पूछने जैसी मानसिकता को खत्म करने के लिए क्या किया जाएगा? झूठे और अपमानजनक आरोप लगाकर किसी को बदनाम करने जैसी जातिगत सोच को समाप्त करने के उपाय क्या होंगे? अखिलेश यादव ने सरकार के आदेश को सिर्फ़ रोक लगाने तक सीमित बताते हुए इसे मूल समस्या का समाधान न देने वाला करार दिया।
यूपी सरकार का आदेश
* कार्यवाहक मुख्य सचिव दीपक कुमार ने यह आदेश जारी किया है।
* राज्य भर के जिलाधिकारियों, वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों को दिया गया निर्देश।
* जाति आधारित राजनीतिक रैलियों और सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक
* पुलिस दस्तावेजों में जाति विवरण केवल आवश्यक मामलों में दर्ज हो (जैसे एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम)
* सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर जातिगत संकेतों पर निगरानी
सरकार का तर्क है कि जाति आधारित रैलियां सामाजिक संघर्ष और राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा हैं।
अदालत का निर्देश
यह आदेश इलाहाबाद हाई कोर्ट के 16 सितंबर के फैसले पर आधारित है। कोर्ट ने राज्य सरकार से कहा कि पुलिस दस्तावेजों में जाति का उल्लेख केवल कानूनी रूप से आवश्यक मामलों में हो और सामान्य मामलों में इसे हटा दिया जाए। यूपी सरकार का यह आदेश राजनीतिक पार्टियों के लिए बड़े झटके की तरह है। सपा, बसपा, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, निषाद पार्टी, अपना दल पार्टियां इसका शिकार बनेंगी। इन पार्टियों ने चुनाव से पहले जाति-आधारित जनसभाएं आयोजित कर अपने आधार को मजबूत किया है। UP News