UP बीजेपी अध्यक्ष की कुर्सी पर जातीय संग्राम, ब्राह्मण बनाम OBC की टक्कर
UP News
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 10:51 AM
उत्तर प्रदेश
RP Raghuvanshi
29 Nov 2025 10:51 AM
UP News : देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में BJP अपने नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश में है लेकिन ये महज संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि 2027 के मिशन यूपी की रणनीतिक बुनियाद भी तय करेगा। BJP अब तक देश के 22 राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर चुकी है मगर उत्तर प्रदेश को लेकर अब तक तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है जातीय समीकरणों की जटिल बिसात जिसे हल किए बिना बीजेपी कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। बीजेपी समझ रही है कि उत्तर प्रदेश अध्यक्ष का चेहरा ही 2027 के विधानसभा चुनाव का प्रमुख संदेशवाहक बनेगा। यही कारण है कि पार्टी इस फैसले को बेहद सोच-समझकर लेने में जुटी है।
बीजेपी के लिए अग्निपरीक्षा
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक गठजोड़ के दम पर BJP को करारा झटका दिया। 2019 में 62 सीटें जीतने वाली बीजेपी इस बार 33 पर सिमट गई। अब पार्टी उसी PDA को काउंटर करने की तैयारी में है और उसके लिए जरूरी है ऐसा प्रदेश अध्यक्ष, जो जातीय समीकरणों को ध्रुवीकरण की बजाय समावेशन की दिशा में मोड़े।
संगठन OBC के पास?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही ठाकुर समुदाय से आते हैं, यानी सत्ता पर सवर्णों का वर्चस्व पहले से है। ऐसे में संगठन की कमान ओबीसी या दलित को सौंपना, बीजेपी की पॉलिटिकल बैलेंसिंग के लिहाज से अहम है। अब तक के संकेतों के मुताबिक बीजेपी ओबीसी से जुड़े कई नामों पर मंथन कर रही है, बीएल वर्मा (लोधी समाज), धर्मपाल सिंह (पशुपालन मंत्री), बाबूराम निषाद (राज्यसभा सांसद, मल्लाह समाज), स्वतंत्र देव सिंह (कुर्मी नेता), अशोक कटारिया (गुर्जर समाज), वहीं दलित वर्ग से राम शंकर कठेरिया और विद्यासागर सोनकर जैसे नाम भी चर्चा में हैं।
इटावा से बदले समीकरण
हाल की इटावा घटना ने ब्राह्मण राजनीति को चर्चा में ला दिया है। एक वर्ग की राय है कि सपा के करीब आ रहे ब्राह्मणों को इटावा कांड के बाद बीजेपी की तरफ मोड़ने का सुनहरा मौका है। ऐसे में बीजेपी ब्राह्मण चेहरा चुनने पर भी विचार कर रही है। हालांकि, इस कदम से पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग पर असर पड़ सकता है क्योंकि इससे ओबीसी और दलित वर्ग खुद को अलग-थलग महसूस कर सकते हैं।
चेहरे से बदलेगी दिशा
बीजेपी को अब तय करना है कि वह प्रदेश अध्यक्ष पद के जरिए अपने कोर वोट बैंक (सवर्ण) को साधे या नए सामाजिक समीकरणों में तालमेल बैठाए। 2022 से पहले पार्टी ने लगातार ओबीसी चेहरों को अध्यक्ष बनाया है केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और फिर भूपेंद्र चौधरी। यही रणनीति फिर दोहराई जाए या ब्राह्मण कार्ड खेला जाए इसी पर पेंच फंसा हुआ है।
अब कब होगा ऐलान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपी बीजेपी का अगला अध्यक्ष सिर्फ एक पदाधिकारी नहीं, बल्कि पार्टी की आगामी रणनीति का प्रतीक होगा। यह नियुक्ति तय करेगी कि पार्टी पीडीए मॉडल की काट कैसे तलाशती है और 2027 में विजय पथ पर लौटती है या नहीं। सूत्रों की मानें तो बीजेपी पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान कर सकती है और इसके बाद यूपी की कमान का फैसला होगा। बीजेपी संगठन के चुनावी नियमों के तहत पहले वोटर लिस्ट, फिर नामांकन, स्क्रूटनी और फिर चयन प्रक्रिया होगी जिसमें कम से कम 4 दिन का वक्त लगेगा।
बीजेपी चाहती है कि यह फैसला जल्द हो, लेकिन सियासी संतुलन साधने की मजबूरी के चलते हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। यूपी बीजेपी का नया अध्यक्ष कौन होगा ओबीसी, ब्राह्मण या दलित? यह सवाल अब सिर्फ जाति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे राज्य की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने वाला सवाल बन चुका है। UP News