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UP News : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर अपनी साफगोई से पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यशैली पर सवाल उठा दिए हैं। इस बार उनका निशाना है — पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना, जिसकी असलियत जानकर हर कोई हैरान है। आइए बिंदुवार जानते हैं कि योगी सरकार ने कैसे पारदर्शिता लाकर ना केवल जनता के करोड़ों रुपये बचाए, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी करारा वार किया।
2016 में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे का शिलान्यास तो हुआ,
लेकिन ज़मीन अधिग्रहण की कोई तैयारी नहीं थी।
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 340 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का केवल दिखावटी शिलान्यास किया गया था।
योगी जी ने कहा कि पिछली सरकार ने ज़मीन खरीदे बिना ही 15,200 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर दिए थे।
न तो काम शुरू हुआ था, न ही कोई ठोस योजना बनी थी।
यह सब कुछ केवल जनता को भ्रमित करने के लिए किया गया था।
योगी सरकार ने पूरी प्रक्रिया रद्द करवाई।
सभी टेंडर फिर से बुलाए गए, और पारदर्शी तरीके से चयन हुआ।
इस बार काम की शुरुआत ज़मीन अधिग्रहण के बाद हुई, जिससे प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और निष्पक्ष बनी।
जहां पिछली सरकार 15,200 करोड़ खर्च करना चाहती थी, वहीं योगी सरकार ने सिर्फ 11,800 करोड़ में इस परियोजना को पूरा कर दिखाया।
इससे 3400 करोड़ रुपये की भारी बचत हुई, जो जनता के टैक्स का पैसा था।
बिना नाम लिए CM योगी ने विपक्षी नेताओं पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जो नेता आज सभ्यता का चोला पहनकर सामने आते हैं, वही कभी प्रदेश को जातिवाद और भ्रष्टाचार में डुबो चुके हैं। UP News :
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