जनता की जेब पर बिजली का करंट: जून में 4.27% महंगा होगा बिजली बिल
UP News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 04:52 PM
UP News : उत्तर प्रदेश की जनता को एक और महंगाई का झटका लगने वाला है। जून महीने से प्रदेश के 3.45 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल में 4.27% की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ेगा। यह वृद्धि नई ईंधन अधिभार शुल्क नीति के अंतर्गत की जा रही है, जिसके जरिए मार्च महीने का 390 करोड़ रुपये का अधिभार वसूला जाएगा। इस बढ़ोतरी की घोषणा से उपभोक्ताओं में नाराजगी है। उपभोक्ता परिषद ने भी विरोध जताया है।
बिजली दरों में उतार-चढ़ाव का खेल
पिछले कुछ महीनों में बिजली दरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। अप्रैल में दरें 1.24% बढ़ी थीं। मई में थोड़ी राहत मिली थी, जब दरें 2% कम की गईं। लेकिन अब जून में फिर से वृद्धि कर दी गई है, जिससे आम उपभोक्ता परेशान है। राज्य में पहले से ही उपभोक्ताओं पर 33,122 करोड़ का बकाया है। ऐसे में यह नई बढ़ोतरी उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त भार डालेगी।
उपभोक्ता परिषद का विरोध : अवैध और असंवेदनशील कदम
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने इसे "गैर-कानूनी" करार देते हुए कहा कि जब उपभोक्ताओं पर पहले से इतना बकाया है, तो अधिभार की वसूली उन बकाया राशियों से समायोजित की जानी चाहिए, न कि आम जनता के वर्तमान बिलों में जोड़ा जाए।
वर्मा की दलील
पावर कॉर्पोरेशन द्वारा मल्टी ईयर टैरिफ रेगुलेशन के तहत 30% दर वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है, जो उपभोक्ताओं पर भारी बोझ डालेगा।
उन्होंने कहा कि परिषद इस मुद्दे को जल्द ही विद्युत नियामक आयोग के समक्ष उठाएगी। अवधेश वर्मा ने बिजली व्यवस्था के निजीकरण के संभावित प्रयासों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में लोक महत्व का एक प्रस्ताव दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग की है।
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के आदेश का दिया हवाला
उन्होंने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग के 2015 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि "हरियाणा सरकार को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 86(2) के तहत सलाह दी गई थी कि निजीकरण से पहले एक निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए।" वर्मा चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही किया जाए, ताकि उपभोक्ताओं के हित सुरक्षित रह सकें और निजीकरण से पहले उसकी वास्तविक आवश्यकताओं और प्रभावों की जांच हो सके। UP News
उपभोक्ताओं के लिए कठिन समय
बिजली की बढ़ती दरें, अधिभार की वसूली, और संभावित निजीकरण ये सभी फैसले आम जनता को प्रभावित करते हैं। जब महंगाई पहले से ही आम आदमी की कमर तोड़ रही है, तब बिजली जैसे आवश्यक सेवा में लगातार वृद्धि चिंताजनक है। उपभोक्ता परिषद का यह कदम इस बात का संकेत है कि जनता की आवाज को बुलंद करने की जरूरत है, ताकि नीतिगत फैसलों में जनहित सर्वोपरि रखा जा सके। आप एक नागरिक के तौर पर यह कर सकते हैं कि अपने क्षेत्रीय विधायकों या जनप्रतिनिधियों से इस मुद्दे को उठाने की अपील करें। उपभोक्ता परिषद द्वारा प्रस्तावित शिकायत पत्र/याचिका का समर्थन करें। सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाएं और इस मुद्दे को जनचर्चा का विषय बनाएं। UP News