
UP News | Energy Drink : इन दिनों युवा वर्ग में एनर्जी ड्रिंक पीने का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के डाक्टर सुबोध कुमार ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश समेत देश भर के युवा वर्ग की नींद उड़ाने में एनर्जी ड्रिंक एक बड़ा रोल अदा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में किए गए एक सर्वे से पता चला है कि उत्तर प्रदेश के युवाओं में एनर्जी ड्रिंक पीने का क्रेज लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के युवा वर्ग में नींद न आने की शिकायत आम होती जा रही है। जब पूरे उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में युवा वर्ग में नींद न आने का अध्ययन किया गया तो पता चला कि उत्तर प्रदेश के युवाओं में एनर्जी ड्रिंक पीने का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। इसी कारण युवा वर्ग में नींद न आने से बहुत कम नींद आने की समस्या बढ़ती ही जा रही है। डाक्टरों की मानें तो उनका कहना है कि एनर्जी ड्रिंक युवा वर्ग में मीठे जहर की तरह घातक परिणाम ला रहे हैं। यह समस्या उत्तर प्रदेश ही नहीं पूरे देश में बढ़ती जा रही है।
एनर्जी ड्रिंक के दुष्प्रभाव को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि लोकप्रिय पेय पदार्थों में शुमार एनर्जी ड्रिंक युवाओं की नींद उड़ा रहा है। साथ ही अनिद्रा की समस्या भी पैदा कर रहा है। हाल में हुए अध्ययन में जो युवा महीने में केवल एक से तीन बार एनर्जी ड्रिंक का सेवन करते हैं, उनमें भी नींद से जुड़ी समस्याओं में इजाफा देखा गया। अध्ययन के नतीजे ओपन एक्सेस जर्नल- बीएमजे ओपन में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इन एनर्जी ड्रिंक्स में आमतौर पर प्रति लीटर करीब 150 मिलीग्राम कैफीन होता है। साथ ही इसमें चीनी, विटामिन, खनिज और अमीनो एसिड भी अलग-अलग मात्रा में होते हैं। इन ड्रिंक्स को ऐसे दर्शाया जाता है कि यह मानसिक और शारीरिक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का तर्क है कि इन्हें एनर्जी ड्रिंक्स बताना भ्रामक है, क्योंकि चीनी को छोडक़र अन्य तत्व ऊर्जा प्रदान नहीं करते। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट ने भी अपने अध्ययन में खुलासा किया है कि एनर्जी ड्रिंक्स में अतिरिक्त कैफीन होता है। भारत की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था भारतीय खादय सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इन एनर्र्जी ड्रिंक्स को गैर अल्कोहल युक्त पेय पदार्थों के रूप में परिभाषित करती है। हालांकि इसमें कैफीन, ग्वाराना, टॉरिन और जिनसेंग जैसे उत्तेजक पदार्थ होते हैं।
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 18 से 35 वर्ष की आयु के 53,266 युवाओं के आंकड़ों की समीक्षा की। जो छात्र और छात्राएं प्रतिदिन एनर्जी ड्रिंक पीते थे वे उन लोगों की तुलना में करीब एक घंटे कम सोते थे जो कभी-कभार या बिल्कुल भी नहीं पीते थे। इसका प्रभाव इस बात में भी देखा गया कि वे रात में कितनी बार जगे और उन्हें सोने में कितना समय लगा। जैसे-जैसे उन्होंने एनर्जी ड्रिंक की मात्रा बढ़ाई उनके रात में सोने और जागने का समय बढ़ गया। इसका सीधा सा तात्पर्य यह है कि उनकी नींद में लगातार खलल पड़ा। इसी तरह जो लडक़े प्रति दिन एनर्जी ड्रिंक पीते थे उनके हर रात छह घंटे से भी कम सोने की संभावना उनकी तुलना में दोगुनी से भी अधिक थी, जो कभी-कभार इनका सेवन करते थे।