
UP News : परंपरागत खेती छोड़कर अलग करने की सोच रहे किसानों के लिए अच्छी खबर है। अब किसान मछली पालन के साथ ही सिंघाड़े की खेती कर सकते हैं। इसमें भूमि संरक्षण विभाग किसानों का मददगार बनेगा। दरअसल, उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक किसान के द्वारा मछली पालन किया जा रहा है। जिस तालाब में वह किसान मछली पालन करता है उसी तालाब में वो सिंघाड़ा की खेती भी करता है। जिससे कि उस किसान को डबल मुनाफा होता है और सालाना लाखों में कमाई भी करता है।
यूपी के हरदोई जिले के पिहानी कस्बे में रहने वाले किसान हीरालाल बताते हैं कि वह पिछले 20 वर्षों से मछली पालन करते आ रहे हैं। वह 5 बीघे के तालाब में रामपुर जिले के मिलक से मछलियों के बच्चे लाते हैं जिन्हें तालाब में छोड़ देते हैं। धीरे धीरे जब मछली के बच्चे बड़े हो जाते हैं तो व्यापारी उनके तालाब पर ही आकर मछलियों को खरीदकर ले जाते हैं।
मछली पालन के साथ हो रही सिंघाड़े की खेतीकिसान हीरालाल का कहना है कि वह मछली पालन के साथ ही सिंघाडे की पैदावार भी करते हैं। मगर इसके लिए उन्हें बहुत एहतियात भी बरतनी पड़ती है। हीरालाल बताते हैं कि तालाब को कई भागों में बांट दिया जाता है। तालाब के कुछ हिस्से में सिंघाडे रखे जाते हैं और कुछ में मछली के बच्चे। जब सिंघाडे की फसल पूरी हो जाती है तो वह उन मछली के बच्चों को तालब के सिंघाडे वाले हिस्से में छोड़ देते हैं। जिससे मछली के बच्चों को पर्याप्त भोजन भी मिलता है। सिंघाडे की खेती के बाद जो भी वेस्टेज बचता है, धीरे-धीरे यही वेस्टेज खाकर साथ ही उन्हें फीड देकर मछली के बच्चों को बड़ा करते हैं फिर बेच देते हैं।
किसान हीरा लाल कहना हैं कि वह पिछले 20 वर्षों से मछली पालन का काम करते आ रहे हैं। साथ ही सिंघाडे की खेती भी कर रहे हैं। हीरालाल का कहना है कि वह 50 हजार रुपए में 5 बीघे का तालाब लीज पर लेते हैं। उसके बाद उसमें 50 हजार के मछली के बच्चे छोड़ देते हैं। अब इसकी लागत निकालने के लिए वह इस तालाब में सिंघाडे की खेती भी कर लेते हैं। जिससे उनकी लागत आसानी से निकल आती है और शेष मछली पालन से लाखों रुपये की बचत भी कर लेते हैं। UP News