
UP News : पटियाला हाउस कोर्ट से यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में बड़ी राहत मिलने के बाद पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सोमवार को जब अयोध्या पहुंचे, तो माहौल किसी विजेता के स्वागत जैसा था। एयरपोर्ट से लेकर रामनगरी तक, जगह-जगह उनका भव्य स्वागत हुआ। समर्थकों ने फूल बरसाए, जयघोष किए और बृजभूषण सिंह ने भी खुलकर अपनी बात रखी। भीड़ से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा, 18 जनवरी 2023 को मेरे ऊपर जो आरोप लगे थे, उसी दिन मैंने कहा था – यह झूठ है। मैंने यहां तक कहा था कि अगर मेरे ऊपर लगे आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो मैं खुद फांसी पर झूल जाऊंगा। आज न्यायपालिका ने सत्य को प्रमाणित कर दिया। मैं पहले भी अदालत पर भरोसा करता था और आज सार्वजनिक रूप से न्यायपालिका के प्रति आभार प्रकट करता हूं।
अपने चिर-परिचित शैली में बृजभूषण सिंह ने कहा, जो खोया, उसका कोई ग़म नहीं और जो पाया है, वो भी कम नहीं। जिन खिलाड़ियों ने मुझ पर आरोप लगाए, वो कभी मुझे कुश्ती का भगवान कहा करते थे। वो मेरे घर पर आते-जाते थे, उनके त्योहारों और विवाह कार्यक्रमों में मैं शामिल होता था। आज वही लोग आरोप लगाने वालों की कतार में हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने भावुक अंदाज में फिल्मी गीत की पंक्तियां भी दोहराईं – कभी पास आकर मुझे ये बता दें, मिला है क्या उन्हें मुझे यूं सता के। उन्होंने कहा, “इस तरह के आरोपों ने न केवल मुझे बल्कि समाज के कई निर्दोष लोगों को झकझोर दिया है। कई वरिष्ठ अधिकारियों ने आत्महत्या कर ली, कई बच्चों की ज़िंदगियाँ तबाह हो गईं। ये बातें अब दस्तावेज़ों में भी दर्ज हैं।”
पूर्व सांसद ने यौन उत्पीड़न से जुड़े कानूनों के दुरुपयोग पर भी सरकार का ध्यान खींचा। उन्होंने स्पष्ट कहा, इन धाराओं की उपयोगिता है, लेकिन अब यह हथियार बन चुकी हैं। दहेज उत्पीड़न, दलित उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न जैसे कानूनों का दुरुपयोग हो रहा है।
उन्होंने मांग की कि सरकार इन कानूनों की समीक्षा करे – हम ये नहीं कह रहे कि धाराएं हटाई जाएं, लेकिन इनका दुरुपयोग रोकने के लिए ठोस उपाय जरूर होने चाहिए। यदि किसी पर झूठा यौन उत्पीड़न का आरोप लगे और वो गलत साबित हो जाए, तो झूठा आरोप लगाने वालों को उससे दुगनी सजा मिले। तभी न्याय की असली भावना जीवित रह सकती है।
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर निशाना साधते हुए बृजभूषण सिंह ने कहा, मुझे झूठे मामलों में फंसाने की साजिश रची गई थी। आम आदमी पार्टी ने जब मेरा विरोध किया, तो खुद उनका राजनीतिक अस्तित्व संकट में आ गया। कांग्रेस और दीपेंद्र हुड्डा जैसे नेता तो 11 बजे तक मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे थे, लेकिन दोपहर 11 के बाद संतरी बनने लायक भी नहीं बचे। अंत में उन्होंने जोर देकर कहा, मैं बजरंगबली का भक्त हूं। मुझे किसी का भय नहीं। जिन्होंने मेरे खिलाफ साजिशें रचीं, उनका न्याय भगवान करेंगे। मेरा चरित्र कोई खरोच तक नहीं पहुंचा सकता। UP News