हाई कोर्ट सख्त: मेंस टॉयलेट की सफाई महिला कर्मियों से क्यों? सरकार से मांगा जवाब
High Court
भारत
चेतना मंच
27 Nov 2025 10:44 PM
UP News : उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बेहद अहम और संवेदनशील मुद्दे पर चिंता जताई है। उत्तर प्रदेश की इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बने पुरुष शौचालयों की सफाई महिला सफाईकर्मियों से कराए जाने पर हैरानी जाहिर की है। यह टिप्पणी कोर्ट ने रायबरेली जिले के ग्राम ज्योना से जुड़े एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दी।
शौचालयों के रखरखाव का पूरा ब्यौरा कोर्ट में पेश करें
जस्टिस ए.आर. मसूदी और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव (प्रथम) की पीठ ने कहा कि, पुरुष शौचालयों की सफाई का जिम्मा महिला कर्मचारियों को देना न केवल ग्राम पंचायत की योजनाओं के विरुद्ध है, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी असंगत और अनुचित है। कोर्ट ने संबंधित ग्राम प्रधान को आदेश दिया है कि वह शपथ पत्र के माध्यम से शौचालयों के रखरखाव का पूरा ब्यौरा कोर्ट में पेश करें। साथ ही, कोर्ट ने इस कार्य में लगी महिला स्वयं सहायता समूह को अब तक किए गए भुगतान का भी विस्तृत ब्योरा मांगा है।
सफाई व्यवस्था पर उठाए गए थे सवाल
याचिकाकर्ता जमुना प्रसाद की ओर से दायर याचिका में ग्राम पंचायत ज्योना (ब्लॉक महाराजगंज, जिला रायबरेली) में सामुदायिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। सुनवाई के दौरान ग्राम प्रधान उमेश कुमार ने अदालत को बताया कि ग्राम सभा में महिलाओं और पुरुषों के लिए तीन-तीन सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं, जिनकी देखरेख 12 सदस्यीय महिला स्वयं सहायता समूह कर रहा है।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता
प्रधान ने यह भी दावा किया कि सभी शौचालयों में बिजली और पानी की पूरी व्यवस्था है। हालांकि, कोर्ट इस बात पर संतुष्ट नहीं हुआ कि महिला कर्मियों से पुरुष टॉयलेट्स की सफाई कराई जाए। अब कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि न सिर्फ शौचालयों के रखरखाव की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, बल्कि यह भी देखा जाए कि किसी की गरिमा या निजता से समझौता न हो। साथ ही, महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता दी जाए। UP News