चीन ने मान ली होती बात तो उत्तर प्रदेश पर हो जाता नेपाल का कब्जा
UP News :
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:41 AM
UP News : उत्तर प्रदेश भारत का सबसे महत्वपूर्ण तथा सबसे बड़ा प्रदेश है। उत्तर प्रदेश को लेकर इतिहास में एक से बढ़कर एक तथ्य मौजूद हैं। इतिहास का एक पक्ष यह भी बताता है कि एक अवसर ऐसा भी आया था कि भारत का पड़ोसी देश नेपाल उत्तर प्रदेश पर कब्जा करना चाहता था। उत्तर प्रदेश पर कब्जा करने के लिए नेपाल ने चीन से मदद मांगी थी। और उसे समय यदि चीन ने नेपाल की बात मान ली होती तो उत्तर प्रदेश के ऊपर नेपाल का कब्जा हो जाता।
नेपाल के साथ मिलती है उत्तर प्रदेश की बड़ी सीमा
और यह प्रमाण आईटी सत्य है कि उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी सीमा नेपाल के साथ मिलती है। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड बिहार सिक्किम तथा पश्चिम बंगाल की सीमा भी नेपाल की कुछ हिस्सों से मिलती हैं। उत्तर प्रदेश की 651 किलोमीटर की सीमा सीधे तौर पर नेपाल की सीमा के साथ जुड़ी हुई है। उत्तर प्रदेश की पीलीभीत श्रावस्ती महाराजगंज लखीमपुर बहराइच सिद्धार्थ नगर तथा बलरामपुर जिलों की सीमा नेपाल से मिलती है। उत्तर प्रदेश के साथ नेपाल की सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं। तमाम संबंधों को एक किनारे पर रखते हुए बहुत पहले नेपाल ने उत्तर प्रदेश पर कब्जा करने की योजना बनाई थी। दरअसल यह समय हुआ था जब भारत में अंग्रेजों का राज था। अंग्रेजों की कंपनी ईस्ट इंडिया कंपनी की निगाह नेपाल पर पूरी तरह कब्जा करने की थी। इसी नीति के तहत वर्ष 1814 में अंग्रेजों ने नेपाल के विरुद्ध जंग छेड़ दी थी।
ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत से लगे नेपाल के हिस्सों पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया था। बचाव के लिए गोरखा लोग ब्रिटिश थानों पर हमला करने लगे। तब अंग्रेजों ने 1814 में नेपाल के खिलाफ जंग छेड़ दी। UP News
चीन से मदद मांगी थी नेपाल ने
नेपाल के गोरखा साम्राज्य ने अंग्रेजों से लड़ाई में चीनियों की मदद मांगी, लेकिन चीन को अंग्रेजों से दुश्मनी मोल लेने में कोई फायदा नजर नहीं आया। हालांकि, उसने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता की। चर्चित सुगौली संधि के तहत अंग्रेजों ने नेपाल के लाभदायक हिस्से पर कब्जा करके बाकी को स्वतंत्र रहने दिया। अपने महत्वपूर्ण हिस्सों को खोने की कसक नेपाल के मन में बनी रही। लेकिन, वह अंग्रेजों को अकेले युद्ध में हरा नहीं सकता था, इसलिए उसने चीन को शीशे में उतरना शुरू किया। नेपाल के राजा राजेंद्र विक्रम शाह ने कई बार चीन को आगाह किया कि अंग्रेजों ने समूचे भारत पर कब्जा कर लिया है। ऐसे में चीन भी ज्यादा देर तक सुरक्षित नहीं रह सकेगा। चीन को नेपाल से गठजोड़ करके भारत पर धावा बोल देना चाहिए।
चीन ने नेपाल के प्रस्ताव को अधिक गंभीरता नहीं लिया। उसे लगता था कि अंग्रेजों से अपनी हार का बदला लेने के लिए गोरखा साम्राज्य उसके कंधे पर बंदूक रखकर चलाना चाहता है। हालांकि, गोरखाओं की आशंका सही साबित हुई। जल्द ही अफीम के व्यापार को लेकर चीनियों और अंग्रेजों के रिश्ते खराब होने लगे। अंग्रेज भारत में जबरदस्ती अफीम की खेती कराते और उसे चीनियों को देकर उनसे चाय और रेशम लेते। चीन पर दोहरी मार पड़ रही थी। उसने अंग्रेजों की करीब 14 सौ टन अफीम जब्त कर ली। नशे का कारोबार जारी रखने के लिए अंग्रेजों ने 1839 में अफीम युद्ध छेड़ दिया। इसमें चीनियों की हार हुई। UP News
उत्तर प्रदेश पर हमले का प्रस्ताव दिया था
नेपाल के राजा राजेंद्र विक्रम शाह ने एक बार फिर चीन के पास भारत के उत्तर प्रदेश वाले भाग पर हमले का प्रस्ताव भेजा। उन्होंने चीनी सम्राट डीएओजीयूएनजी को लिखे पत्र में पूरी रणनीति बताई। इसके मुताबिक, चीन अगर नेपाल की सैन्य या आर्थिक मदद कर दे, तो वे लोग अंग्रेजों के खिलाफ जंग छेड़ देंगे। इससे अंग्रेजों का ध्यान बंट जाएगा और इस मौके का फायदा उठाकर चीनी सैनिक कोलकाता या दिल्ली तक पहुंच सकते हैं, जो ब्रिटिश हुकूमत के शासन का केंद्र थे। चीन ने नेपाल के प्रस्ताव को फिर रद्दी की टोकरी में डाल दिया। उसे लगा कि जो अंग्रेज उस पर भारी पड़ रहे हैं, उनसे मुकाबले के लिए नेपाल को धन या सैनिक देना बेकार है। हालांकि, चीन को बाद में अपनी गलती का अहसास हुआ। किंग वंश के वफादार और कई प्रशासनिक सुधारों की नींव रखने वाले डब्लूईआईवाईयूएएन ने बाद में कहा था, 'अगर हमारे मंत्रियों को भूगोल या विदेशी राजनीति की जरा भी जानकारी होती, तो उन्होंने गोरखा को अंग्रेजों का ध्यान भटकाने के लिए मदद दे दी होती। इस सूरत में अंग्रेजों को नेपाल से भी भिड़ना पड़ता और उनकी पूरी सेना चीन से मुकाबले के लिए नहीं आ पाती। ऐसे में हम उन्हें आसानी से हरा देते।' UP News