UP News : यूपी में 79 लाख अपात्र सरकार को लगा रहे थे 8 हजार करोड़ चूना
भारत
RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 04:39 AM
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RP Raghuvanshi
02 Dec 2025 04:39 AM
Lucknow : लखनऊ। यूपी और केंद्र सरकार की ओर से चलाए जा रहे जनहिताकरी योजनाओं का लाभ अपात्र लोग उठाकर सरकार को 08 हजार करोड़ रुपये का चूना लगा रहे हैं। ऐसे फर्जी लाभार्थियों की संख्या हजार दो हजार नहीं, बल्कि 79 हजार बताई जा रही है। मामले का खुलासा होने पर सरकार अब फर्जी लाभार्थियों के नाम सूची से बाहर किया है।
सरकार ने की 79 लाख फर्जी लाभार्थियों की पहचान की है, जो 11 विभागों द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए अपात्र थे। ये लोग गलत तरीके से सब्सिडी, प्रोत्साहन और पेंशन के वितरण का लाभ उठा रहे थे। दरअसल, किसी तरह की देरी से बचने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से सरकारी योजनाओं का पैसा लाभार्थियों के खाते में भेजा जाता है। इसी का लाभ अपात्र लोग उठा रहे थे। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2.70 लाख व्यक्ति महिला कल्याण विभाग को गुमराह कर राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का लाभ वापस ले रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य और नागरिक आपूर्ति, महिला कल्याण, सामाजिक कल्याण, चिकित्सा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, मत्स्य पालन, विकलांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण, श्रम, व्यावसायिक और कौशल विकास, बुनियादी शिक्षा, हथकरघा, कपड़ा उद्योग और शहरी विकास सहित 11 विभाग इसके लिए जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार द्वारा लाभार्थियों को प्रदान किए जाने वाले लाभों को स्थानांतरित करना। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन विभागों के अलावा 19 और विभाग इस प्रक्रिया में शामिल हैं, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किए जाने वाले लाभों को सुविधाजनक बनाने में 11 विभाग सबसे आगे हैं। उनके डेटा की प्राथमिकता के आधार पर जांच की गई। इन वर्षों में कुल लाभ 2019-20 में 29,884 करोड़ रुपये से बढ़कर 2020-21 में 39,215 करोड़ रुपये और 2021-22 में 41,050 करोड़ रुपये हो गया है। यह राशि लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के तहत दी गई है।
एक अधिकारी ने बताया कि हमने नकली लाभार्थियों को बाहर निकालने के लिए एक अभियान शुरू किया है। लाभार्थियों के दस्तावेजों की जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में यूपी के सभी जिलों में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ज्यादातर मामलों में परिवारों ने अपनी वार्षिक आय को कम बताया, जबकि कुछ मामलों में वास्तविक लाभार्थी का निधन हो गया था। लेकिन, उनके बच्चे लाभ उठा रहे थे। ऐसी गलतियों को चिह्नित कर उन्हें सूची से हटाकर एक नई सूची अपडेट की गई है। इस प्रक्रिया से 8,062 करोड़ रुपये की बचत हुई है। 79 लाख 08 हजार 682 फर्जी लाभार्थियों को डीबीटी सूची से हटा दिया गया है। यूपी में विभिन्न डीबीटी योजनाओं के तहत लगभग 8.35 करोड़ व्यक्तियों का पंजीकरण किया गया था। खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा अधिकतम विसंगतियों का पता लगाया गया, जिसके बाद 55.51 लाख राशन कार्ड रद्द किए गए।