उत्तर प्रदेश के नक्शे में अब एक नया नाम जुड़ने जा रहा है कल्याण सिंह नगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि राज्य में एक नया जिला बनाया जाएगा, जो अलीगढ़ और बुलंदशहर के कुछ हिस्सों को मिलाकर तैयार होगा। यह वही इलाका है, जहां से पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपनी राजनीति की शुरुआत की थी। यह कदम केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक स्मृति और सामाजिक पहचान से जुड़ी एक प्रतीकात्मक पहल भी माना जा रहा है। UP News :
भारत में जिलों की बढ़ती संख्या
आजादी के वक्त 1947 में भारत में करीब 230 जिले थे। वर्तमान में देश के 28 राज्यों और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 797 जिले हैं।
सबसे तेजी से जिलों की संख्या बढ़ाने वाले राज्यों में राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
इन जिलों में राजस्थान में हाल के वर्षों में 19 नए जिले बने हैं। आंध्र प्रदेश ने भी 19 जिले जोड़े। मध्य प्रदेश में 10 नए जिलों का गठन हुआ है। पश्चिम बंगाल ने 2022 में 7 नए जिलों की घोषणा की थी। पिछले दस सालों में देशभर में 40 से ज्यादा नए जिले बने हैं।
कैसे बनता है नया जिला?
नए जिले का गठन पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है। यह या तो विधानसभा में विधेयक पारित करके या सरकारी अधिसूचना जारी करके किया जा सकता है। प्रक्रिया कुछ इस तरह होती है।
1. पहले सीमाओं का निर्धारण किया जाता है।
2. संसाधन, बजट और प्रशासनिक विभाजन तय होता है।
3. इसके बाद डीएम (जिलाधिकारी) और एसपी (पुलिस अधीक्षक) की नियुक्ति की जाती है।
4. धीरे-धीरे प्रशासनिक ढांचा आकार लेने लगता है।
यदि किसी जिले का नाम बदला जाना हो, तो केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना जरूरी होता है।
नया जिला बनने पर कितना आता है खर्च?
एक नया जिला बनाने में औसतन 2000 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है। इसमें शामिल हैं।
* भवन निर्माण (डीएम/एसपी आॅफिस, कलेक्ट्रेट, न्यायालय, अस्पताल आदि) लगभग 500 करोड़
* सड़क, बिजली, पानी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर करीब 1500 करोड़
* स्टाफ की नियुक्ति, वाहन, उपकरण और सार्वजनिक सुविधाएं अतिरिक्त व्यय।
राज्य के अनुसार यह खर्च अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, राजस्थान सरकार ने नए जिलों के लिए 1000 करोड़ का बजट रखा था।
लोगों के जीवन में क्या बदलेगा?
अलीगढ़ और बुलंदशहर के कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यह न केवल समय की बबार्दी है, बल्कि सरकारी योजनाओं तक पहुंच में भी बाधा बनती है। नया जिला बनने के बाद प्रशासनिक कार्य तेजी से होंगे। सरकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ेगी। कानून-व्यवस्था मजबूत होगी। स्थानीय रोजगार, बाजार और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। यह बदलाव भले ही रातों-रात न दिखे, लेकिन विकास की दिशा निश्चित रूप से बदल जाएगी। कल्याण सिंह नगर नाम की घोषणा भाजपा के सामाजिक आधार और स्मृति-राजनीति को जोड़ने वाली रणनीति के रूप में भी देखी जा रही है। यह पार्टी के राजस्थान-से-ब्रज बेल्ट तक के वोट बैंक में भावनात्मक संदेश देने वाला कदम माना जा रहा है। UP Newsधमकी देने वाला पाक अब अफगान के आगे गिड़गिड़ाया