कानपुर मेट्रो घोटाला : 80 करोड़ लेकर गायब हुई तुर्की कंपनी, ठेकेदार बेहाल
UP News
भारत
चेतना मंच
28 May 2025 07:08 PM
UP News : कानपुर में तुर्की की कंपनी के एक बड़े घोटाले का मामला प्रकाश में आया है। यह मामला कानपुर मेट्रो परियोजना में एक बड़े वित्तीय विवाद और संभावित घोटाले की ओर इशारा करती है, जिसमें तुर्की की निर्माण कंपनी गुलेरमैक पर स्थानीय ठेकेदारों का लगभग 80 करोड़ रुपया बकाया है। यह मामला न सिर्फ आर्थिक बल्कि कूटनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी गंभीर बन गया है। दरअसल तुर्की की कंपनी गुलेरमैक, जो कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट के कॉरिडोर-1 के चार भूमिगत स्टेशनों का निर्माण कर रही थी, अचानक शहर छोड़कर भाग गई। कंपनी पर आरोप है कि उसने लगभग 40 स्थानीय ठेकेदारों को पिछले 10 महीनों से भुगतान नहीं किया, जिसकी कुल राशि लगभग 80 करोड़ है।
ठेकेदारों का आरोप
कंपनी ने जानबूझकर भुगतान में देरी की, खासकर जब भारत में तुर्की की भूमिका को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। सभी वरिष्ठ अधिकारी शहर छोड़कर फरार हो गए हैं। फोन पर संपर्क करने की कोशिशें विफल रहीं। ठेकेदारों ने यूपीएमआरसी से शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंतत: 9 ठेकेदारों ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी है।
बकाया भुगतान का विवरण
ठेकेदार कंपनी बकाया राशि (रुपया)
मेट्रो मार्बल 3.70 करोड़
रेडिएंट सर्विसेज 1.20 करोड़
श्रेयांस इन्फ्राटेक 1.70 करोड़
एस इंटीरियर 74.80 लाख
एमडी एहसान पेंटर 39.80 लाख
विनोद गुप्ता एंटरप्राइजेज 8.54 लाख
नंदन प्रीफैब 29.50 लाख
श्री बालाजी एंटरप्राइजेज 21.50 लाख
यूपीएमआरसी की सफाई
पंचानन मिश्रा (संयुक्त महाप्रबंधक, जनसंपर्क) के अनुसार गुलेरमैक को भुगतान किया जा चुका है। यानी यूपीएमआरसी का सीधा कोई बकाया नहीं। ठेकेदार गुलेरमैक के सब-कॉन्ट्रैक्टर्स हैं, और उनसे कंपनी को भुगतान करना था। 5% राशि रिजर्व में रखी गई है, जो 1 साल बाद जारी की जाती है। यदि गुलेरमैक भुगतान नहीं करती है तो यूपीएमआरसी वह राशि सीधे ठेकेदारों को देगा।
प्रशासन का रुख
जिला प्रशासन ने जांच शुरू करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह मामला कानपुर मेट्रो प्रोजेक्ट में वित्तीय पारदर्शिता की कमी और सबकॉन्ट्रैक्टिंग प्रक्रिया में दोषों को उजागर करता है। विदेशी कंपनी की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित की जाएगी? यूपीएमआरसी और गुलेरमैक के अनुबंध में पारदर्शिता कितनी थी? स्थानीय ठेकेदारों की सुरक्षा की क्या गारंटी है? आर्थिक विवादों के बीच मेट्रो प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर क्या असर होगा? इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा। UP News
जनता और ठेकेदारों की मांग
सीबीआई या आर्थिक अपराध शाखा से जांच हो। गुलेरमैक के भारत में सभी संपत्तियों को जब्त कर ठेकेदारों को भुगतान हो। यूपीएमआरसी सब-कॉन्ट्रैक्टर्स के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाए। भविष्य में ऐसे मामलों से बचने के लिए लोकल लेबर/सप्लायर सुरक्षा प्रावधानों को कानूनन मजबूती दी जाए। UP News