बोबिल बने पीसीएस अफसर, गांव व समाज हुआ गौरवान्वित
UP News : बागपत/नई दिल्ली। एक छोटे से किसान के घर में पैदा होने वाले बोबिल कुमार हैं तो एक सामान्य परिवार से किन्तु सपने बड़े थे। ये बड़े सपने कैसे पूरे हुए इस आशय की कहानी बड़ी दिलचस्प है। 3 दिन पहले बोबिल उप्र के पीसीएस अफसर बन गये हैं। माटी के इस लाल ने कमाल कर दिया है और वह भी कोई छोटा-मोटा कमाल नहीं बल्कि बागपत जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर यह युुवक आज एक बड़ा अफसर बन गया है।
यह कहानी शुरू होती है बागपत जिले के एक छोटे से गांव हेवा से। हेवा के रहने वाले चौ. राममिहर सिंह एक छोटे से किसान हैं। उनके घर में बोबिल कुमार नामक बच्चे ने जन्म लिया। यह बच्चा गांव के ही स्कूल जनता इंटर कॉलेज में पढ़ने गया। आंखों में एक बड़ा सपना लेकर। यह सपना था भारत की सबसे प्रतिष्ठित लोक सेवा यानी आईएएस अफसर बनने का। इस सपने को लेकर बोबिल दिल्ली विश्वविद्यालय में बीटेक (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई करते हैं किन्तु इस पढ़ाई से संतुष्ट नहीं होते फिर वे कानून की पढ़ाई की ओर मुड़ते हैं और फिर दिल्ली विवि से ही कानून (एलएलबी) की पढ़ाई करते हैं। यहां भी पूर्ण संतुष्टि का अभाव रहता है। तत्पश्चात राजनैतिक विज्ञान में एमए करते हैं और फिर शुरू होता है भारत के सबसे प्रतिष्ठित सेवा यानी लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा का। क्योंकि जिद थी सिविल सर्वेंट बनने की। फिर साल 2016 और 2017 में दो बार बोबिल कुमार यूपीएसई की परीक्षा पास करते हैं, किन्तु इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाने के कारण आईएस बनने से चूक जाते हैं। 3 दिन पहले (19 अक्टूबर 2022) यूपीपीएसई यानी उप्र लोकसेवा की परीक्षा का अंतिम नतीजा आता है उसमें बोबिल कुमार न केवल पीसीएस अधिकारी बन गये हैं बल्कि उन्होंने पूरी परीक्षा में 16वीं रैंक हासिल कर ली है। गांव की मिटटी में पले-बढ़े बोबिल कुमार की इस उपलब्धि पर आज न केवल उनका परिवार बल्कि पूरा हेवा गांव, बागपत जिला यहां तक कि गांव में रहना वाला हर व्यक्ति गौरवान्वित महसूस कर रहा है कि गांव की मिटटी से निकला एक युवक तमाम संघर्षों को चुनौती देता हुआ आज अफसर बन गया है।