2027 की तैयारी : मायावती कांशीराम की पुण्यतिथि पर यूपी में करेंगी बड़ा शक्ति प्रदर्शन
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 07:12 PM
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुट गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि पर 9 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखनऊ के कांशीराम स्मारक पर विशाल जनसभा आयोजित करने की घोषणा की है। दावा है कि उत्तर प्रदेश के लखनऊ में होने वाले इस शक्ति प्रदर्शन में पांच लाख से अधिक लोग शामिल होंगे। UP News :
पार्टी की रणनीति और लक्ष्य
हाल के वर्षों में बसपा का ग्राफ लगातार गिरा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी केवल एक सीट जीत पाई थी, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी से एक भी सीट नहीं मिली। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के खतरे के बीच 2027 का चुनाव पार्टी के लिए करो या मरो की स्थिति बन गया है। ऐसे में कांशीराम की पुण्यतिथि रैली बसपा के लिए सियासी ताकत और एकजुटता का संदेश देने का बड़ा मंच बनेगी।
विपक्षी दलों पर पार्टी को कमजोर करने की साजिश का आरोप
मायावती ने 7 अगस्त को लखनऊ में राष्ट्रीय बैठक के दौरान रैली की रूपरेखा तैयार की थी। नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गईं और अधिक से अधिक भीड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया। 7 सितंबर की बैठक में उन्होंने विपक्षी दलों पर पार्टी को कमजोर करने की साजिश का आरोप लगाया और कार्यकतार्ओं को सतर्क रहने की हिदायत दी। बूथ समितियों के गठन का काम 80 फीसदी पूरा हो चुका है और मायावती ने बाकी तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं।
आकाश आनंद की वापसी और नई रणनीति
पार्टी में हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देखे गए। 2019 में मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया और 2023 में उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। हालांकि 2024 में आकाश और उनके ससुर, राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन अब दोनों की वापसी हो चुकी है। आकाश को फिर से राष्ट्रीय संयोजक बनाकर पार्टी में एकजुटता और संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है।
2007 की यादें और सियासी संदेश
2007 में बसपा ने यूपी में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। मायावती अब उसी ताकत को फिर से जगाने की कोशिश कर रही हैं। इस रैली का उद्देश्य केवल विपक्ष को चुनौती देना ही नहीं, बल्कि कार्यकतार्ओं में जोश और आत्मविश्वास भी भरना है। रैली के बाद पार्टी 2027 के चुनावी अभियान को और तेज करेगी।
जानकार क्या कहते हैं?
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली बसपा के लिए एक लिटमस टेस्ट होगी। अगर पार्टी बड़ी संख्या में जनता जुटाने में सफल रही, तो 2027 के चुनाव में उसकी संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। वहीं, लगातार घटते वोट प्रतिशत और संगठनात्मक चुनौतियों के बीच मायावती के लिए यह राह आसान नहीं होगी। कांशीराम पुण्यतिथि पर होने वाली यह रैली केवल एक समारोह नहीं, बल्कि बसपा के लिए राजनीतिक पुनर्जनन का अवसर मानी जा रही है। अब देखना यह है कि क्या मायावती 2027 में 2007 का इतिहास दोहरा पाएंगी। UP Newsयूपी सरकार का बड़ा फैसला : सभी शैक्षणिक संस्थानों के कोर्सेज की होगी सघन जांच