अब अहमदाबाद है देश का सबसे साफ शहर; लखनऊ ने रच दिया इतिहास, 44वें से तीसरे स्थान पर पहुंचा
UP News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 07:18 PM
UP News : स्वच्छता के क्षेत्र में इस वर्ष एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। केंद्र सरकार द्वारा जारी स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 की रैंकिंग के अनुसार, देश का सबसे साफ शहर अब गुजरात का अहमदाबाद बन गया है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए दूसरा स्थान प्राप्त किया है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली और गर्वपूर्ण छलांग उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने लगाई है, जो पिछली रैंकिंग में 44वें पायदान पर था, और अब सीधे तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
लखनऊ की ऐतिहासिक छलांग : 41 शहरों को पीछे छोड़ा
स्वच्छता सर्वेक्षण में लखनऊ ने जो प्रगति दिखाई है, वह केवल आंकड़ों की छलांग नहीं, बल्कि जन-चेतना और प्रशासनिक संकल्प का परिणाम है। 44वें से तीसरे स्थान तक का यह सफर दर्शाता है कि यदि जनता और प्रशासन मिलकर काम करें, तो किसी भी शहर की छवि बदली जा सकती है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए लखनऊ को 17 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सम्मानित किया जाएगा। नगर निगम के प्रतिनिधियों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया जा चुका है।
कैसे बदली लखनऊ की तस्वीर?
इस बदलाव के पीछे एक संगठित और दूरदर्शी रणनीति रही है। नगर आयुक्त की अगुवाई में स्वच्छता मिशन को अभियान का रूप दिया गया। डिजिटल निगरानी और डेटा-आधारित सफाई मॉनिटरिंग से कचरा प्रबंधन बेहतर हुआ। जागरूकता रैलियों, स्कूल-कार्यक्रमों और मोहल्ला समितियों की भागीदारी से जनता भी इस अभियान में सहभागी बनी। "जन आंदोलन" की भावना के साथ नागरिकों ने अपने शहर की स्वच्छता को व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझा। गौरतलब है कि इंदौर, जो लगातार कई वर्षों तक सबसे साफ शहर बना रहा था, इस बार टॉप 3 की सूची से बाहर हो गया है। इसकी विस्तृत रैंकिंग और कारणों की जानकारी 17 जुलाई को आधिकारिक घोषणा के बाद सामने आएगी।
लखनऊ की नजर अब नंबर 1 पर
नगर निगम अधिकारियों और लखनऊवासियों का अगला लक्ष्य स्पष्ट है। देश का सबसे साफ शहर बनना। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में न केवल सफाई व्यवस्था को और आधुनिक किया जाएगा, बल्कि सांस्कृतिक स्थलों, बाजारों और जलाशयों पर विशेष ध्यान देकर सस्टेनेबल क्लीन मॉडल की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। लखनऊ का यह कायाकल्प सिर्फ नगर निगम की कार्रवाई नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के उत्थान की कहानी है। यह उदाहरण साबित करता है कि जब सिस्टम और समाज साथ चलते हैं, तब परिवर्तन महज सपना नहीं, वास्तविकता बन जाता है।