
तालाब के पास मिला था सारस का बच्चा
अफरोज ने बताया कि 6 महीने पहले वह कुछ काम से चांदा क्षेत्र में गए हुए थे। वहां मछली पालन वाले तलाब के पास उन्हें ये सारस मिला था। उस वक्त उन्हें ये नहीं पता चला कि ये सारस का बच्चा है या किसी और पक्षी का। अफरोज के मुताबिक अगर ये बच्चा वहां रहता तो किसी जानवर का शिकार हो जाता। उस वक्त वहां कोई नहीं था, इसीलिए उसे वह अपने घर ले आए और उसका ख्याल रखा। कुछ ही दिनों में ये सारस अफरोज और उनके परिवार वालों के साथ काफी घुल-मिल गया। अब यह सारस पांच फीट से ज्यादा लंबा हो गया है।
सारस जाने से अफरोज बेहद निराश
वन विभाग द्वारा सारस को ले जाने के बाद अफरोज बेहद निराश नजर आ रहा है। अफरोज ने बताया कि वह हर तरह से लिखा-पढ़ी को तैयार है कि सारास को किसी भी हाल में नुकसान नहीं पहुंचाएगा। अफरोज ने साफ कहा कि उसे राजनीति से दूर रखा जाए और उसकी स्वीटी यानी सारस को उसके सुपुर्द कर दिया जाए। अभी सारस बच्चा है, उड़ना भी नहीं जानता, जब उड़ना जान जाएगा तो वह उसे खुद ही छोड़ देगा।
अफरोज पर दर्ज हुआ मुकदमा
वहीं, जिला वनाधिकारी आरके त्रिपाठी ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उन्हें अफरोज के सारस पालने की जानकारी मिली थी। लिहाजा टीम भेजकर पता करवाया गया तो सूचना सही पाई गई। फिर सारस को कब्जे में ले लिया गया है। फिलहाल राजकीय पक्षी के पालने के आरोप में अफरोज पर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पक्षी विहार में छोड़ा जाएगा सारस
जिला वनाधिकारी ने बताया कि सारस को वन विभाग कार्यालय में रखा गया है। सारस पूरी तरह स्वस्थ है। बहरहाल आलाधिकारियों को सूचना दी गई हैl साथ ही उनके निर्देश पर सारस को किसी पक्षी विहार में छोड़ दिया जाएगा। सारस के वापसी को लेकर डीएफओ ने बताया कि राज्य पक्षी को पालना नहीं चाहिए, बल्कि वन विभाग को सूचना देना चाहिए।