अब यूपी का ये शहर बनेगा स्वच्छता की राजधानी, इंदौर मॉडल से सुधरेगी सफाई व्यवस्था
UP News
भारत
चेतना मंच
02 Dec 2025 04:52 AM
UP News : भारत के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर का सफाई मॉडल अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की तस्वीर बदलने जा रहा है। नगरीय प्रशासन विभाग की पहल पर इंदौर और भोपाल के वरिष्ठ स्वच्छता अधिकारियों की एक टीम इन दिनों चार दिवसीय दौरे पर काशी पहुंची है, जहां वे स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्वच्छ काशी का मास्टर प्लान तैयार कर रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य वाराणसी की सफाई व्यवस्था को इंदौर की तर्ज़ पर आधुनिक, टिकाऊ और तकनीक-आधारित बनाना है।
क्या है इंदौर मॉडल? क्यों बना मिसाल?
स्वच्छता रैंकिंग में इंदौर लगातार 7 वर्षों तक नंबर-1 पर रहा है। इसकी खासियत है कि 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण यहां किया जाता है। गीला और सूखा कचरा अलग-अलग संग्रह व निस्तारण किया जाता है। कचरे का शून्य डंपिंग मॉडल यहां पर है। हर कचरे की प्रोसेसिंग होती है। खुले में कचरा फेंकना पूर्णत: प्रतिबंधित है। कचरे से कंपोस्ट, प्लास्टिक ईंधन और पेवर ब्लॉक निर्माण किया जाता है। मोबाइल ऐप से कचरा वाहन बुलाने की सुविधा (जल्द लागू) की जाएगी। इंदौर मॉडल ने यह दिखा दिया कि जनभागीदारी, तकनीक और निरंतर निगरानी से कोई भी शहर कचरे के ढेर से निकलकर मिसाल बन सकता है।
काशी में क्या हो रहा है?
वाराणसी में तैनात नगर निगम और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ इंदौर-भोपाल की टीम ने स्वच्छता प्रबंधन की बारीकियों पर साझा मंथन किया है। इसमें शामिल विषय रहे: घर-घर कचरा एकत्र करने की प्रक्रिया, कचरे का प्रारंभिक पृथक्करण (गीला-सूखा),
वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट तक सीधी आपूर्ति, जनता की भागीदारी कैसे सुनिश्चित हो, पुराने सिस्टम में तकनीक का समावेश करना। यह पहली बार है जब इंदौर की अफसरशाही किसी अन्य शहर में जाकर सीधे मॉडल इंप्लीमेंटेशन की कार्य योजना बना रही है।
दिल्ली से मिला निर्देश, रिपोर्ट बनी, अब कार्यान्वयन की बारी
दिल्ली स्थित नगरीय प्रशासन मंत्रालय ने वाराणसी में सफाई को लेकर इंदौर मॉडल अपनाने का निर्देश पहले ही जारी कर दिया था। इस क्रम में पहले फोटो, वीडियो और दस्तावेजों के जरिए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी। अब अफसरों की फील्ड विजिÞट से रिपोर्ट को जमीनी हकीकत के अनुरूप ढाला जा रहा है।
बनारस के लिए क्यों जरूरी है ये पहल?
वाराणसी न सिर्फ प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है, बल्कि एक धार्मिक और पर्यटन नगरी भी है, जहां प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में यहां की साफ-सफाई सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि सांस्कृतिक आवश्यकता भी बन चुकी है। इंदौर मॉडल को लागू करना न केवल सफाई व्यवस्था को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि गंगा और घाटों की स्वच्छता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। स्वच्छ भारत मिशन का अगला बड़ा अध्याय अब काशी की गलियों से लिखा जाएगा, और उसमें इंदौर का अनुभव मार्गदर्शक बनेगा। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो यह न केवल वाराणसी बल्कि देश के अन्य ऐतिहासिक और भीड़भाड़ वाले शहरों के लिए रोडमैप बन सकता है।