UP News : उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री विभाग की ऑनलाइन सुविधा बनी जी का जंजाल
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भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 05:13 PM
जारी हो रहे हैं तुगलकी फरमानराजकुमार चौधरी
UP News : लखनऊ/नोएडा। यदि पटरी का बेस मजबूत न हो तो उस पर ट्रेन का सरपट दौड़ना संभव नहीं है। शायद यही वजह है कि सरपट रेल दौड़ाने के लिए उसके नीचे की जमीन को मजबूत किया जाता है। लेकिन, इतनी सी बात उत्तर प्रदेश रजिस्ट्री विभाग (Uttar Pradesh Registry Department)को ऑनलाइन करने वाले इंजीनियरों को समझ नहीं आई। रजिस्ट्री विभाग को हाईटेक करने के चक्कर में अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करने वाले लोग घनचक्कर हो रहे हैं। ये आनलाइन यानि सुगम कही जाने वाली व्यवस्था कई लोगों के जी का जंजाल बन रही है। अत्याधुनिक होती इस व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
गौरतलब है कि इन दिनों पूरे देश के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए सरकारी विभागों को ऑनलाइन करने के लिए उत्तर प्रदेश संचार क्रांति के रास्ते पर चल पड़ी है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश का रजिस्ट्री विभाग भी लगभग ऑनलाइन कर दिया गया है। खास बात यह है कि आम लोगों को यह बताया जा रहा है कि अब वे रेंट एग्रीमेंट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज भी घर बैठे बना लेंगे। लेकिन, एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। यदि कोई नियम बनता है तो वह पहले विधानसभा में पास होगा। फिर उसका गजट बनेगा। नोटिफिकेशन के बाद किसी भी जिलाधिकारी को इसे लागू करने का अधिकार होगा, लेकिन गौतमबुद्धनगर में इन नियमों को ताक पर रखकर ऐसे निर्देश जारी कर दिए गए कि घर बैठे एग्रीमेंट बन रहे हैं।
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परेशानी का सबब यह है कि उदाहरण के तौर पर यदि आपको अपनी संपत्ति की रजिस्ट्री करानी है तो सबसे पहले आपको अपनी संपत्ति की डिटेल रजिस्ट्री विभाग की वेबसाइट पर जाकर अपलोड करनी होगी। उसके बाद आपको एक टोकननुमा कागज मिलेगा। इस पर आपके द्वारा दर्ज की गई पूरी डिटेल होगी। इन सभी दस्तावेजों को सेव रखने के लिए रजिस्ट्री विभाग का अपना सर्वर है, जबकि रजिस्ट्री कराने के लिए जो फीस अदा करनी होती हैं उसके लिए बैंक के सर्वर पर कनेक्ट होना होता है, जिस पर ऑनलाइन फीस जमा होगी। क्योंकि बैंक का सर्वर रजिस्ट्री विभाग के सर्वर से अलग है। इसलिए कई बार इंटरनेट या अन्य तकनीकी कारणों से फीस नियत समय पर जमा नहीं हो पाती हैं। अगर फीस जमा भी हो जाती है तो उसे अपडेट होने में समय लगता है।
फीस जमा करने के लिए शासन ने सभी रजिस्ट्री कार्यालयों को आपस में कनेक्ट किया हुआ है। एक दृष्टांत से समझें तो स्थित ये है कि कई बार नोएडा में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने वाले आवेदक को ग्रेटर नोएडा ऑफिस का समय शेड्यूल मिल रहा है।
सूत्रों के अनुसार जनपद गौतमबुद्धनगर में एक महीने में औसतन 300 रजिस्ट्री का आंकड़ा होना चाहिए, लेकिन सर्वर और अन्य तकनीकी खामी की वजह से यह आंकड़ा 100 पर सिमट रहा है। इस तकनीकी गड़बड़ के कारण आम नागरिकों को तो आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता ही है, साथ ही सरकार को भी राजस्व का नुकसान हो रहा है।
खास बात यह है कि नोएडा प्राधिकरण की औद्योगिक संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के नियम अलग हैं। यदि आपने औद्योगिक संपत्ति खरीदी है और उसे अपने नाम कराना है, तो आपको पहले उत्तर प्रदेश सरकार के अधिकृत निवेश मित्र पोर्टल पर जाना होगा। आपको ऑनलाइन अपनी संपत्ति की जानकारी वहां दर्ज करनी होगी। वहां से एनओसी यानि क्लियरेंस मिलने के बाद यह जानकारी रजिस्ट्री विभाग की साइट पर जाएगी। फिर बैंक के सर्वर पर फीस जमा होगी। तब कहीं जाकर रजिस्ट्री की तिथि और समय यानि टोकन मिलेगा और रजिस्ट्री होगी। इस बीच यदि सर्वर, इंटरनेट या अन्य तकनीकी परेशानी हुई तो आपको बताने वाला कोई नहीं होगा। नतीजतन, जो काम एक दिन में निपट जाना चाहिए उसके लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है।
उड़ गया डाटा
सूत्रों के मुताबिक हाल ही में रजिस्ट्री विभाग का सर्वर तकनीकी कारणों से हैंग हो गया था। विभाग के पोर्टल पर पुराना ब्योरा डिलीट हो गया। अब कई लोग अपनी रजिस्ट्री कराने के लिए रजिस्ट्री विभाग के चक्कर काट रहे हैं। उनके पास बैंक में पैसे जमा करने की पावती भी है, लेकिन विभाग के कर्मचारी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। उनका तर्क है कि जो पोर्टल पर दिखेगा, उसी को वह मानेंगे। जो ब्योरा आवेदक के पास है, वह पोर्टल पर नहीं है।
होना यह चाहिए था
एक इंटरनेट कंपनी के संचालक पल्लव अग्रवाल बताते हैं कि विदेश में जब ऑनलाइन व्यवस्था लागू की जाती है तो उसे एक साल तक परखा जाता है। उसमें जो खामियां होती हैं, उन्हें दूर करने के बाद पब्लिक रिव्यू लिए जाते हैं। उसी के बाद उसको चलन में लाया जाता है, लेकिन हिंदुस्तान में थोपने की परंपरा चल रही है, जिसकी वजह से ये समस्याएं खड़ी हो रही हैं।
बढ़ेगी दबंगई
ऑनलाइन रेंट एग्रीमेंट करने की जो व्यवस्था लागू की गई है, उसे लेकर बड़े सवाल उठ रहे हैं। हमारे संविधान में स्पष्ट व्यवस्था है कि इस तरह के मामले में नियम पहले विधानसभा में बनाए जाते हैं, उसके बाद उसका नोटिफिकेशन जारी होता है। तब जाकर उसे जमीनी स्तर पर लागू किया जा सकता है, लेकिन यह नियम नोएडा में लागू कर दिया गया है। इसे लागू करने से पहले ये भी नहीं सोचा गया कि प्रत्येक उपभोक्ता के करार की शर्तें अलग अलग होती हैं। एक फॉर्मेट में सारे एग्रीमेंट नहीं बन सकते। सवाल उठता है कि यदि कोई व्यक्ति घर बैठकर करार करेगा तो उसका वेरिफिकेशन कैसे होगा? जानकार मानते हैं कि घर बैठकर कोई भी दबंग व्यक्ति सीधे-साधे व्यक्ति को जबरदस्ती हस्ताक्षर कराने के लिए बाध्य करेगा, जिससे अपराध बढ़ेंगे और अपराधियों के मंसूबे पूरे होते रहेंगे।
क्या कहते हैं अफसर
रजिस्ट्री विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रजिस्ट्री कम होने की वजह इंटरनेट और ऑनलाइन सुविधा में आने वाली दिक्कतें हैं। शासन स्तर पर इसके सुधार के लिए मंथन चल रहे हैं, लेकिन यह परेशानी आने वाले दिनों में भी कम होती नहीं दिख रही है। इस अधिकारी का साफ मत है कि विभाग के ऊंचे पदों पर बैठे लोग जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं, इसी कारण हवा में फैसले लिए जा रहे हैं। इन फैसलों से आम जनता व सरकार दोनों को हानि उठानी पड़ रही है।