यूपी के इस शहर का पीजीआई 16 शहरों के लिए बना वरदान
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 01:39 AM
UP News : यूपी में कभी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को राजधानी लखनऊ का रुख करना पड़ता था। यूपी के किसी भी जिले में महीनों तक नंबर का इंतजार, भारी-भरकम खर्च और दलालों के जाल में फंसे लोगों के लिए यह किसी दुखदायी अनुभव से कम नहीं था। लेकिन अब यूपी की तस्वीर बदल चुकी है। यूपी के कानपुर का गणेश शंकर विद्यार्थी सुपर स्पेशलिटी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट (पीजीआई) पूरे बुंदेलखंड, अवध और पश्चिमी यूपी तक के मरीजों के लिए संजीवनी बन चुका है।
यहां रोज 1000 से 1200 मरीज कराते हैं इलाज
सिर्फ दो साल में ही यहां रोज 1000 से 1200 मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। न सिर्फ कानपुर, बल्कि आसपास के 16 जिलों कन्नौज, फरुर्खाबाद, इटावा, औरेया, उन्नाव, हमीरपुर, बांदा, जालौन, फतेहपुर, रायबरेली, शाहजहांपुर, हरदोई, महोबा, कासगंज, इटावा और झांसी के लोग यहां की आधुनिक सुविधाओं से लाभ उठा रहे हैं।
सरकारी अस्पताल लेकिन फीलिंग प्राइवेट की
पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह कहते हैं यहां मरीजों को सरकारी अस्पताल का खर्च उठाना पड़ता है, लेकिन इलाज का स्तर प्राइवेट अस्पताल से कहीं ऊपर है। यहां पर उपलब्ध आधुनिक मशीनें पूरे देश में इक्का-दुक्का जगह पर ही हैं। यही वजह है कि मरीजों को सिर्फ 50 रुपये के पर्चे से इलाज मिल रहा है और बाकी खर्च प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में 90% तक कम आता है।
मौत के मुहाने से लौटे मरीज
यहां आए कई मामले ऐसे हैं जिन्हें सुनकर ही रूह कांप उठे, लेकिन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी।
केस 1 : 28 हफ्ते के गर्भ के साथ एक महिला ब्रेन ट्यूमर की शिकार होकर पहुंची। किसी भी अस्पताल ने उम्मीद नहीं जताई, लेकिन पीजीआई के डॉक्टरों ने मां और बच्चे दोनों की जान बचा ली। आज जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
केस 2: एक मरीज जिसने गुस्से में अपने सिर में खुद कील ठोक ली थी, उसे भी यहां के डॉक्टरों ने मौत के मुहाने से वापस जिंदगी दी।
ऐसे सैकड़ों केस पीजीआई को सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि जिंदगी लौटाने वाला केंद्र बना चुके हैं।
मरीजों की जेब पर नहीं पड़ता बोझ
यहां पर दलालों का कोई खेल नहीं है। हर फ्लोर पर टीवी मॉनिटर लगे हुए हैं, जिन पर हर जांच और दवा की कीमत साफ-साफ दिखाई जाती है। यहां तक कि दवाएं भी अस्पताल के सरकारी स्टोर से मुफ्त या बेहद सस्ते दाम पर मिल जाती हैं। आयुष्मान योजना के तहत इलाज बिल्कुल मुफ्त है और बाकी मरीजों का खर्च भी प्राइवेट अस्पतालों की तुलना में 80-90% कम आता है।
सुपर स्पेशलिटी का विस्तार
जब यह अस्पताल 2023 में खुला था तो यहां सिर्फ न्यूरोलॉजी की ओपीडी थी। लेकिन दो साल में यह बढ़कर न्यूरो सर्जरी, न्यूरो रेडियोलॉजी, गैस्ट्रो मेडिसिन, यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, पेन मेडिसिन, एंडोक्रिनोलॉजी, पीएमआर, क्रिटिकल केयर मेडिसिन और न्यूरो एनेस्थीसिया जैसी 9 सुपर स्पेशलिटी तक पहुंच चुका है। इनमें से पेन मेडिसिन देश की पहली यूनिट है। UP News
पूरे यूपी के लिए उम्मीद की नई किरण
कानपुर का पीजीआई न सिर्फ एक अस्पताल है, बल्कि 16 शहरों और हजारों परिवारों की उम्मीद का दूसरा नाम बन चुका है। यहां आने वाले हर मरीज की कहानी, हर बची हुई जिंदगी यह बताती है कि अब गंभीर बीमारियों का इलाज सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि कानपुर जैसे मेडिकल हब तक पहुंच चुका है। UP News