उत्तर प्रदेश के सबसे सफल IAS अफसर के रास्ते पर चल रहा है पीएमओ
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RP Raghuvanshi
14 Jun 2024 08:17 PM
UP News : पीएमओ यानि प्रधानमंत्री का कार्यालय। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का कार्यालय (PMO) उत्तर प्रदेश की एक पुरानी विचारधारा के साथ चलता है। उत्तर प्रदेश में लम्बे अर्से तक तैनात रहे सबसे सफल IAS अफसर ने PMO को चलाने का जो तरीका ईजाद किया था PMO आज भी उसी रास्ते पर चल रहा है। इतना ही नहीं 80 वर्ष की आयु के हो चुके उत्तर प्रदेश के इसी IAS अफसर पर आज भी PM मोदी सबसे अधिक भरोसा करते हैं।
उत्तर प्रदेश के हैं PM मोदी के भरोसेमंद IAS अफसर
आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रशांत कुमार मिश्रा उर्फ PK को दूसरी बार अपना प्रधान सचिव बनाया है। दरअसल पीके मिश्रा ने PM मोदी के दूसरे कार्यकाल में यह पद PMO के निवर्तमान प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्राा से प्राप्त किया था। नृपेन्द्र मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के सबसे सफल IAS अफसर रहे हैं। PM मोदी के पहले कार्यकाल में नृपेन्द्र मिश्रा ने PMO को चलाने का जो तरीका ईजाद किया था PMO आज भी उसी तरीके से चलाया जाता है। खबर है कि PM मोदी आज भी जटल विषयों पर उत्तर प्रदेश वाले अपने पूर्व प्रधान सचिव नृपेन्द्र मिश्रा से ही सलाह लेते हैं। नृपेंद्र मिश्रा इन दिनों उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रसिद्ध मंदिर अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष हैं। PMO से सेवा पूरी करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश में वापस भेजकर यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। नृपेन्द्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के ही नोएडा शहर में रहते हैं।
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जान लेते हैं नृपेंद्र मिश्रा को
उत्तर प्रदेश के सबसे सफल IAS रहे नृपेंद्र मिश्रा का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया में कसिली गांव में हुआ. सिवेशचंद्र मिश्रा के बड़े बेटे नृपेंद्र मिश्रा का जन्म आठ मार्च 1945 को हुआ था। वह तीन-तीन विषयों से मास्टर्स हैं। उत्तर प्रदेश की प्रसिद्घ इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से उन्होंने केमेस्ट्री, राजनीतिक विज्ञान और लोक प्रशासन विषय से पोस्ट ग्रेजुएट किया। उन्होंने विदेश में भी पढ़ाई की। उन्होंने कामजॉन एफ कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट, हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान से पढ़ाई की। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन(डब्ल्यूटीओ) में स्पेशल सेक्रेटरी के तौर पर काम किया. फिर 1967 में उत्तर प्रदेश काडर के आईएएस बने। इसके अलावा वह मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स में ज्वाइंट सेक्रेटरी रहे। वर्ल्ड बैंक, एशियन डिवेलपमेंट बैंक, नेपाल सरकार में सलाहकार के रूप में कार्य किया।
उत्तर प्रदेश से दिल्ली तक की यात्रा
जब भारतीय जनता पार्टी की साल 2014 में बहुमत से सरकार बनी तो प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही नरेंद्र मोदी ने अपनी टीम के लिए 'नवरत्नों' की तलाश शुरू कर दी थी। सूत्रों के मुताबिक अपने प्रुमख सचिव पद के लिए उन्हें ऐसा अफसर चाहिए था, जिसे न केवल केंद्र में काम करने का लंबा अनुभव हो,और उस पर किसी तरह का आरोप भी न लगा हो। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश की भी नस-नस से अच्छी तरह वाकिफ हो। जिससे दिल्ली से बैठे-बैठे उत्तर प्रदेश के लिए भी रणनीति बनाई जा सके। मोदी की यह खोज 1967 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के रिटायर्ड आईएएस नृपेंद्र मिश्रा पर जाकर खत्म हुई। नृपेंद्र मिश्रा मोदी के हर पैमाने पर पूरी तरह फिट बैठे।
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आपको बता दें कि IAS से रिटायर होने के बाद नृपेंद्र मिश्रा 2006 से 2009 के बीच ट्राई के चेयरमैन पद पर रहे थे। नियम के मुताबिक ट्राई का चेयरमैन आगे चलकर केंद्र या राज्य सरकार में कोई पद धारण नहीं कर सकता था। यह नियम जब नृपेंद्र मिश्रा की राह में रोड़ा बना तो मोदी सरकार ने ट्राई एक्ट में अध्यादेश के जरिए संशोधन किया जिससे उनके प्रमुख सचिव बनने का रास्ता साफ हो गया। यह कदम भी पीएम मोदी का उनके प्रति भरोसे का सबूत माना जाता है।
ट्राई के चेयरमैन पद से रिटायर होने के बाद नृपेंद्र मिश्रा पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन (PIF) से जुड़े. यह फाउंडेशन समाज में हाशिए पर पहुंचे लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोडऩे के लिए एक थिंकटैंक के रूप में काम करने के लिए जाना जाता है। जब 2014 में बहुमत से बीजेपी की सरकार बनी तो नरेंद्र मोदी की ओर से उन्हें पीएमओ संभालने के लिए बुलावा आया। जिसके बाद नृपेंद्र मिश्रा ने पीआईएफ का काम छोडक़र पीएमओ में चार्ज संभाला। केंद्र-राज्य में काम का लंबा अनुभव रहा है।
यूपी काडर के आईएएस नृपेंद्र मिश्रा कभी मुलायम सिंह यादव और कल्याण सिंह सरकार में प्रमुख सचिव रहे। इस बड़े राज्य में काम करते हुए उन्होंने तेजतर्रार और ईमानदार अफसर की पहचान बनाई। सेवानिवृत होने के बाद मनमोहन सरकार में वह 2006 से 2009 के बीच टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) के भी चेयरमैन रहे। इस प्रकार का कैरियर रहा है उत्तर प्रदेश के सबसे सफल IAS नृपेन्द्र मिश्रा का। UP News